ऐसा मंदिर जहां वर्षों से जल रही आस्था की जोत

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Thursday, April 03, 2014-10:19 AM

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की आराध्य दंतेश्वरी माता के मंदिर में पिछले 25 वर्षों से आस्था की जोत जल रही है। इसका कारण यह है कि आराध्य माई दंतेश्वरी के प्रति आस्था और विश्वास में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र के उत्थान-पतन की साक्षी रहीं माई दंतेश्वरी हमेशा यहां के रहवासियों की सुख-दुख में शामिल रही हैं। मंदिर के विषय में जानकार बताते हैं कि दक्षिण बस्तर की आदिशक्ति मां दंतेश्वरी मंदिर में 1985 में प्रधान पुजारी ने घी के ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए थे।

वहीं 1991 में जगदलपुर के राजस्व निरीक्षक तथा दंतेवाड़ा के लोगों ने तेल की मनोकामना दीप प्रज्ज्वलन करने की परंपरा की शुरुआत की। इसके बाद मां दंतेश्वरी की आस्था और श्रद्धा बढ़ती गई तथा माईजी के मंदिर में हजारों की संख्या में तेल व घी के ज्योत प्रज्ज्वलित हो रहे हैं। मंदिर के प्रधान पुजारी जिया ने विजन न्यूज को बताया कि माई के दरबार में ढाई दशक से ज्योत प्रज्ज्वलित करने की परंपरा शुरू की गई। उन्होंने बताया कि इससे पहले माईजी के मंदिर में परंपरानुसार अखंड ज्योत ही प्रज्जवलित होती रही है। उन्होंने बताया कि वे और उनके चार अन्य सहयोगियों ने घी के पांच ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कर इस परंपरा की शुरुआत की थी।

विदेशों में भी स्थित दंतेश्वरी माई के भक्त शारदीय और वासंतिक नवरात्र पर आस्था के दीप जलाकर अपनी भक्ति प्रदर्शित करते हैं। बताया जाता है कि नेपाल, इंग्लैंड, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया में भी माता के भक्त आस्था के दीप जलाकर माई जी के महिमा के गुणों का गुनगान करते हैं। मंदिर से जुड़े जानकारों ने बताया कि मंदिर का निर्माण चौदहवीं सदी में काकतीय राजवंश के राजा अन्नमदेव द्वारा बनवाया गया था। तब से माता के प्रति शुरू हुई श्रद्धा लगातार बढ़ रही है। वहीं लगभग 27 साल पहले शुरू हुई ज्योति कलश की परंपरा भी अब तक जारी है।

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