लालू के छपरा जैसा बन जाएगा नीतीश का नालंदा!

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Thursday, April 03, 2014-1:00 AM

नई दिल्ली : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृहनगर नालंदा सुशासन की झलक दिखाता है। यहां सड़कें साफ हैं, अतिक्रमण नहीं है और पर्यटकों को दुकानदारों द्वारा लूटा नहीं जाता जबकि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के गृहनगर छपरा की छवि एकदम विपरीत है। सड़कों से लेकर साफ-सफाई के मामले में यह बिहार में लालू के शासन के दिनों की याद दिलाता है। हालांकि नालंदा की हालत छपरा जैसी हो जाने का खतरा है।

चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक लोकसभा चुनावों में लालू का राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नीतीश के जनता दल (यू) से आगे रहेगा। 10 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और राजद में होगा। तो क्या यह बिहार में नीतीश के युग का अंत है? क्या यहां फिर से लालू का राज होगा? चुनावी सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता में कमी आ रही है। यहां तक कि नालंदा में भी उन्हें भाजपा से कड़ा मुकाबला करना पड़ सकता है।

नालंदा में चाय की एक दुकान पर चर्चा के दौरान एक बुजुर्ग कहता है कि मोदी ही देश का भविष्य हैं। वही अकेले ऐसे नेता हैं जो कि हमें कांग्रेस के कुशासन से बचा सकते हैं। उसने कहा कि मोदी को छोड़कर किसी और पार्टी को वोट देना यानी कुशासन को लाना है। पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान जब नीतीश की पार्टी ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था तब उन्हें ऊंची जाति के लोगों, पिछड़ी जातियों, दलितों और अल्पसंख्यकों का काफी समर्थन मिला था। हालांकि ऊंची जाति के लोगों का झुकाव अब भाजपा की ओर अधिक है जबकि अल्पसंख्यकों का वोट अनिश्चित है। नीतीश के जनाधार में कमी आई है। कुछ लोग इसके लिए नीतीश के भाजपा से अलग होने को जिम्मेदार ठहराते हैं।

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