मां ने किया सोनिया पर वार,बेटे को आया भाई पर प्यार

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Thursday, April 03, 2014-2:54 AM

नई दिल्ली : चुनाव के मौसम में भाजपा जोर-शोर से राहुल गांधी के खिलाफ प्रचार करने में व्यस्त है। हाल ही में बरेली में एक रैली को सम्बोधित करते हुए भाजपा नेता मेनका गांधी ने सवाल उठाया था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दुनिया की छठी सबसे अमीर महिला हैं। मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि इतना पैसा कहां से आया। वह दहेज में तो कुछ लेकर नहीं आई थी, फिर करोड़ों रुपए कहां से आए?

इधर मेनका के पुत्र और यू.पी. में भाजपा के ‘फायर ब्रांड’ नेता वरुण गांधी ने एकाएक अपने चचेरे भाई और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ कर एक नई बहस को छेड़ दिया है। वरुण ने सुल्तानपुर में एक सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि वह सुल्तानपुर को अमेठी की तर्ज पर संवारना चाहेंगे। वरुण ने कहा कि यहां लघु उद्योगों को उसी तरह बढ़ावा देने की जरूरत है, जैसे अमेठी में राहुल ने सैल्फहैल्प ग्रुप का सफल प्रयोग करके किया था। वरुण के इस बयान से गद्गद् राहुल ने भी इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अच्छा है कि लोग मेरे काम की तारीफ कर रहे हैं। हालांकि बाद में वरुण ने यह भी कहा कि अमेठी में उन्होंने राहुल के काम को नजदीक से नहीं देखा है लेकिन तारीफ बहुत सुनी है। ऐसे में लोगों के दिमाग में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जहां भाजपा स्मृति ईरानी को राहुल के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़वा रही है और मेनका गांधी इतने तीखे सवाल कर रही हैं, वहीं इस समय वरुण ने ऐसा बयान क्यों दिया?

वैसे वरुण के लिए पार्टी विरोधी बयानबाजी कोई नई बात नहीं है। गत वर्ष बरेली में एक सभा के दौरान भाजपा में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी की दावेदारी को लेकर वरुण ने कहा था कि इस पद के लिए राजनाथ सिंह उनके पसंदीदा उम्मीदवार हैं। यही नहीं, हाल ही में पश्चिम बंगाल में नरेन्द्र मोदी की रैली के बाद भीड़ के संबंध में पूछे जाने पर वरुण ने बड़े निराशापूर्ण ढंग से कहा था कि रैली में भीड़ ठीक-ठाक ही थी, जबकि इस रैली के आयोजन की जिम्मेदारी खुद वरुण ही संभाल रहे थे।

वरुण की ताजा बयानबाजी पर भाजपा क्या कार्रवाई करती है, यह तो समय ही बताएगा मगर पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वरुण गांधी नरेन्द्र मोदी को पसंद नहीं करते और उन्हें नीचा दिखाने के लिए कथित तौर पर ऐसे हथकंडे अपनाते रहते हैं। पार्टी की रीति-नीति के हिसाब से वरुण सार्वजनिक तौर पर मोदी के खिलाफ तो कुछ बोल नहीं सकते लेकिन इस तरह के हथकंडे अपना कर अब वह शायद यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि नरेन्द्र मोदी से राहुल गांधी कहीं बेहतर हैं।

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