हीरो व काले कोट वालों के मिलन में पुलिस बनी विलेन

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Thursday, April 03, 2014-11:14 AM
नई दिल्ली(सतेन्द्र त्रिपाठी): फिल्म की कहानी में भले ही हीरो अच्छे-अच्छों को हिलाकर रख दें, लेकिन असलियत में सब अलग होता है। कड़कडड़ूमा कोर्ट में बुधवार को कुछ ऐसा ही हुआ। फिल्म स्टार व भाजपा प्रत्याशी मनोज तिवारी को वकीलों के एक कार्यक्रम में पहुंचना था। उनके साथ ही पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट के प्रत्याशी महेश गिरी भी पहुंचने वाले थे। लेकिन कोर्ट के बाहर चली सियासत व पुलिस के विलेन बन जाने से न तो स्टार पहुंचे और न नेता।   
 
कड़कडड़ूमा कोर्ट में राजनीतिक माहौल पर चर्चा के लिए यमुनापार से भाजपा के दोनों प्रत्याशियों को बुलाने का कार्यक्रम तय हुआ था। इस कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद शर्मा व सह-संयोजक केके त्यागी थे। इन दोनों अपने साथियों के साथ मिलकर बड़ी मेहनत से सब तैयार किया। ढाई सौ कुर्सियां सजाई गई, मंच भी लगा। पहले तैयारी कोर्ट के जी ब्लॉक में हुई थी। इसके लिए बाकायदा कार्ड भी छापे गए थे। लेकिन ड्रिस्ट्रिक जज ने जी ब्लाक के हॉल को देने से मना कर दिया। अड़चन आई अपने वकील साथियों के लिए शाहदरा बार आगे आई, कार्यक्रम को एफ-ब्लॉक में शिफ्ट किया गया। 
 
समस्या का अंत यही नहीं हुआ पहले तो यह कार्यक्रम भाजपा की गुटबाजी फिर पुलिस का शिकार बन गया। भाजपा नेताओं को कुछ अपने ही लोगों ने डरा दिया कि कोर्ट में गए तो मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन हो जाएगा। एफआईआर भी हो सकती है। अगर वकील किसी बात पर भड़क गए तो लेने के देने पड़ जाएंगे। अभी आयोजक बातचीत में लगे थे कि पुलिस भी विलेन की भूमिका में आ गई। बिना परमिशन कार्यक्रम करने पर बवाल खड़ा होने लगा। संयोजक सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि शाहदरा बार के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने पूर्वी जिला उपायुक्त से बात करके सब ठीक कर दिया, लेकिन सियासत के चलते दोनों प्रत्याशी नहीं पहुंच पाए।  वकीलों ने एकजुट होकर चर्चा की। 
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