नोटा पर जा सकते हैं आजादपुर और ढका के वोटर

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Thursday, April 03, 2014-1:48 PM
नई दिल्ली : लोकसभा के चुनाव में आजादपुर और ढका कालोनियों के करीब 5 हजार वोटर इस बार नोटा पर जा सकते हैं। सालों से इन कालोनियों में रह रहे लोग मकानों का मालिकाना हक मांग रहे हैं। 
 
इन लोगों की दलील है कि जब उनकी तरह की ही कालोनी निमड़ी में रहने वालों को उनका मालिकाना हक दे दिया गया तो उनको भी यह हक मिलना चाहिए। आजादपुर कॉलोनी रेजीडैंट वैलफेयर एसोसिएशन की तरफ से यह मांग लोकसभा चुनाव में खड़े प्रत्याशियों से भी की जा रही है।
 
एसोसिएशन का कहना है कि भारत सरकार ने प्रथम पंच वर्षीय योजना  में समाज के आॢथक रूप से कमजोर वर्ग तथा स्थानीय निकाय के निम्न आय वर्ग वाले बेघर लोगों के लिए इन कालोनियों का निर्माण किया गया था।
 
भारत सरकार ने सहकारी समितियों और स्थानीय निकायों को जमीन की कीमत की 80 फीसदी राशि ऋण सहायता के रूप में दी थी। दिल्ली निगम ने 1955 में आजादपुर, 1956 में ढका और 1964 में निमड़ी कालोनी का निर्माण कराया। 
 
इसके बाद निगम ने 1970 में प्रस्ताव पास किया कि इन कालोनियों का मालिकाना हक नो लॉस नो प्रॉफिट के आधार पर उनमें रहने वाले लोगों को दे दिया जाए। इसमें सफाई कर्मचारी, अनुसूचित जाति तथा जनजाति के आबंटियों को प्राथमिकता दी जाए। लेकिन, इसके बाद निगम ने इस पर काम नहीं किया। एसोसिएशन के मोहन सिंह बंतवाल, आर.पी. सिंह, वेदपाल  और एस.एल. चावडिय़ा ने मांग की है कि सालों से हजारों लोगों की मांग को सरकारें अनसुना करती आ रही हैं। 
 
इस कारण आजादपुर और ढका कालोनी में रहने वाले लोगों का मन खट्टा हो गया है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि उत्तरी नगर निगम की तरफ से इन कालोनियों को उजाड़कर उद्योगपतियों के हवाले करने की योजना है, जिसे वह किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे।
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