बूथ तक निगम पार्षद की होगी सीधी पकड़

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Thursday, April 03, 2014-3:12 PM

नई दिल्ली (अमित कसाना): नॉर्थ वेस्ट दिल्ली लोकसभा में राजधानी की सातों सीटों में से सबसे ज्याद 21 लाख 93 हजार वोटर हैं, जिससे यह सीट हर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, देहात इलाकों को समेटे वेस्ट दिल्ली लोकसभा सीट पर मतों को अपने हक में करना हर पार्टी की कोशिश है। 

वर्तमान में इन दोनों सीटों पर कांग्रेस के सांसद हैं। ऐसे में इन पर बीजेपी ने जीत के लिए अलग रणनीति तैयार की है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस प्लानिंग को नाम दिया गया है मोदी मॉडल। इस मोदी मॉडल का इस्तेमाल बीजेपी ने गुजरात विधानसभा चुनावों में किया था। 

पहली बार बूथ पर संघ के कार्यकर्ता

संघ सूत्रों की मानें तो पहली बार बूथ पर संघ के 2 कार्यकत्र्ता मतदान के दिन मौजूद होंगे, जो हर हरकत पर निगाह रखेंगे। वैसे चुनावों में पोलिंग बूथ की बात करें तो बूथ के अंदर जितनी पार्टी उस सीट पर चुनाव लड़ रहीं होती हैं उन सभी पार्टियों से संबंधित 1 सदस्य को बूथ के अंदर बैठने की इजाजत होती है। 

इसके अलावा बूथ के अंदर केवल चुनाव अधिकारी व बाहर सुरक्षाकर्मी होते हैं। अंदर हर एक पार्टी के सदस्य मतदान में किसी तरह की गड़बड़ी न  हो इस पर नजर रखता है।

अगर उसे लगता है की किसी पार्टी विशेष के हक में कुछ हो रहा है, तो वह उसका विरोध कर इस बात की सूचना वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों को देने की क्षमता रखता है। 

भाजपा का निगम पार्षद होगा हर बूथ पर

बीजेपी ने हर बूथ के लिए एक निगम पार्षद को चुना है। इसके नीचे एक मंडल अध्यक्ष होगा। अध्यक्ष के नीचे 2 कार्यकत्र्ता होंगे। इनकी ड्यूटी बूथ के बाहर होगी। पार्षद की ड्यूटी होगी कि वह अपने बूथ के अंतर्गत आने वाले मतदात सूची में से पहले अपने सपोर्टर के वोट को अलग करे।

इसके लिए वोटिंग वाले दिन सबसे पहले इन लोगों के लिए वोट डलवाने की योजना है। फिर उन लोगों पर नजर होगी जो अन्य पार्टियों जैसे आप, कांग्रेस बसपा व अन्य के समर्थक हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए बीजेपी के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी पर उनकी एक राय है।

ऐसे लोगों को अपने पक्ष में वोट के लिए निगम पार्षदों को खुद उन्हें लेकर बूथ तक पहुंचने की योजना है। 

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