क्या जेल में बंद कैदी डाल सकेंगे वोट?

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Thursday, April 03, 2014-6:13 PM

हरियाणा: भारत के संविधान के अनुसार वोट डालना हर व्यक्ति का संवैधानिक व मौलिक अधिकार है। इस अधिकार से देश में एक अच्छी सरकार बनती है लेकिन केंद्र व प्रदेश सरकार के यह दावे उस समय फेल होते नजर आते है, जब जेल में बंद विचाराधीन कैदी चाहते हुए भी अपने मतदान का प्रयोग नहीं कर पाते।   

जहां एक तरफ जेल में बंद राजनेता चुनाव लडक़र लोगों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। वहीं, देश की जेलों में बंद हजारों लोग जिनके केस आज भी विचाराधीन है चाहकर भी अपनी वोट का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं।

कानून के जानकारों की मानें तो वोट डालना हर व्यक्ति का सवैधानिक अधिकार है और जिस व्यक्ति का केस अंडर ट्रायल है, उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

उधर, हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी श्रीकांत वालगद की मानें तो जो भी कैदी नजरबंद होता है, उसके लिए मतदान करने का प्रावधान है और  इसके लिए बकायदा जेल विभाग से लिस्ट लेकर उन्हें मतदान करने की  अनुमति प्रदान की जाती है , लेकिन जेल में बंद अन्य कैदियों के मतदान के अधिकार के बारे  वह कुछ नहीं बता पाए।

भारत के सर्वोच्च न्यायलय द्वारा हाल ही में पारित किए गए एक आदेश के मुताबिक तीन साल से कम की सजा पाने वाला व्यक्ति जेल के भीतर बैठकर ही अपना चुनाव लड़ सकता है लेकिन  जेल में बंद विचाराधीन या तीन साल से कम की सजा पाने वाले कैदियों के मतदान के अधिकार के बारे में किसी ने भी विचार करना जरूरी नहीं समझा। आज जरूरत है कि सरकार व चुनाव आयोग इस बारे में विचार करे, क्योंकि ऐसा होने के बाद ही भारत सच में एक लोकतांत्रित देश बन पाएगा।
 

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