अखंड पाठ साहिब खंडित होने पर सिखों ने खोला मोर्चा

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Thursday, April 03, 2014-7:18 PM

नई दिल्ली : तिलक विहार कालोनी में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा शुरू किए गए श्री अखंड पाठ साहिब की लड़ी को पुलिस द्वारा रुकवाने और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरुप साथ ले जाने पर सिख भड़क उठे हैं। सिखों ने इस मसले पर कड़ा नोटिस लिया है। इसको लेकर शिरोमणि अकाली दल और दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने संयुक्त रूप से पुलिस स्टेशन के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस मौके पर महिलाओं ने सड़क पर ही पाठ किया और पुरूषों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। 

 
भड़के सिखों ने पूरे मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी का ऐलान किया है। यह कमेटी पूरे मामले की पड़ताल करेगी और जरूरत पड़ी तो दिल्ली के एलजी से मिलकर हल करवाएगी। कमेटी में खुद डीएसजीपीसी के चेयरमैन मंजीत सिंह जीके, महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा, वरिष्ठ नेता अवतार सिंह हित, ओंकार सिंह थापर एवं कुलदीप सिंह भोगल को रखा गया है। 
 
 इस मौके पर दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने कहा कि गिरफतार किए गए नेताओं की रिहाई और दोबारा श्री अखंड पाठ साहिब उसी स्थान पर रखने की मांग पूरी न होने तक तिलक नगर थाने के बाहर बेमियादी धरना जारी रहेगा। वीरवार को दिन में हुए धरना प्रदर्शन के चलते आसपास पूरा यातायात बाधित हो गया। इस दौरान महिलाएं और पुरूष सभी धरने पर बैठ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। 
 
बता दें कि तिलक विहार जोकि 1984 की पीड़ित विधवाओं की कालोनी के रुप में जानी जाती है, यहां पर समाज कल्याण विभाग के प्लाट पर दिल्ली कमेटी द्वारा नशा मुक्ति केंन्द्र, सिलाई केंन्द्र, डिस्पैंसरी और वृद्ध आश्रम, पीड़ित परिवारों के सामाजिक कल्याण के लिए केंद्र खोला जाना था। इसके लिए श्री अखंड पाठ साहिब का अखंड पाठ रखा गया था। 
 
जिसको दिल्ली पुलिस ने  रुकवा दिया। मनजीत सिंह जीके ने कहा कि अगर हम 1984 के पीड़ित परिवारों की भलाई एवमं पुर्नत्थान के लिए कोई सकारात्मक पहल कर रहे थे तो दिल्ली पुलिस बीच में खलल क्यों डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1984 में कांग्रेस की पीठ पीछे खड़े होकर दिल्ली पुलिस ने सिख मरवाए थे और आज फिर 30 साल के बाद कांगे्रस की शह पर सिखों के सामाजिक हकों पर डाका डाल रही है।
 
 दिल्ली पुलिस द्वार गिरफतार किए गए दिल्ली कमेटी के स्थानीय सदस्य चमन सिंह, स्थानीय निवासी जगदीश सिंह, पाठी भाई बहादुर सिंह और बीबी छबनी कौर को तुरन्त छोडऩे की अपील की। जीके के मुताबिक एक दिन पूर्व ही पुलिस अधिकारी से बात हुई थी, जिन्होंने उक्त जमीन के सिलसिले में उपराज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगने का जिक्र किया था। लेकिन उसके पहले ही श्री अखंड पाठ साहिब को खंडित करने एवं श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरुप को अपनी हिरासत में लेने से भी संकोच नहीं किया। 
 
कमेटी के महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा ने पुलिस की इस कार्यवाही को घिनौनी हरकत करार दिया। वरिष्ठ नेता अवतार सिंह हित ने श्री अखंड पाठ साहिब खंडित होने को अंग्रेजों के समय में जैतों के मोर्च के बराबर बताते हुए श्री अखंड पाठ साहिब की दोबारा आरंभता के लिए जरुरत पडऩे पर शहीदी देने की भी घोषणा की। इस अवसर पर कमेटी के उपाध्यक्ष तनवंत सिंहए धर्म प्रचार प्रमुख परमजीत सिंह राणा, सदस्य अमरजीत सिंह पप्पू, गुरबखश सिंह मौंटूशाह, जीत सिंह खोखर, जसबीर सिंह जस्सी एवं अकाली नेता जसप्रीत सिंह विक्की मान मौजूद थे।
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