चुनाव में कांग्रेस को समर्थन: बुखारी

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Friday, April 04, 2014-5:07 PM

लखनऊ: जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस(हाथ) को समर्थन देने की आपील की है। यह फैसला इमाम ने सोनिया गांधी से मिलने के बाद लिया है। बुखारी ने कहा कि, इस चुनाव में किसी भी हाल में सेकुलर वोट ना बंटे। पार्टियों द्वारा सेकुलर वोट को बांटने की कोशिश हो रही है। बुखारी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि पार्टी ने अपने वादे पूरे नहीं किए।

मुजफ्फरनगर के दंगे समाजवादी पार्टी की लापरवाही की वजह से ही दंगे हुए। उन्होंने कहा कि मेरी ही नहीं, करोड़ों हिंदुस्तानी आवाम की आरजू है कि हम ऐसा देश बना सकें जहां, मौकापरस्ती और जुर्म की जगह न हो। बी.एस.पी. और एस.पी. समर्थन के लायक नहीं हैं।

वहीं इमाम ने पश्चिम बंगाल में टी.एम.सी.का समर्थन करने का ऐलान किया है। इमाम के इस फैसले को सुनकर बहुजन समाज पार्टी ने इमाम को कोसते हुए कहा  कि ‘इमाम मौका परस्त हैं।’ भाजपा ने कहा है कि ‘भ्रष्टाचार से बड़ा मुद्दा है सांप्रदायिकता’ जो देश को तोड़ती है।

उन्होंने यह भी कहा कि बसपा को मत देना तो वोट खराब करना है। मौलाना बुखारी ने कहा कि उसने चुनाव के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) में शामिल होने के संबंध में अपने रुख को स्पष्ट नहीं किया है। मौलाना बुखारी ने कहा .. हमनें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ 2014 के चुनाव के संबंध में विचार विमर्श किया ...मैं कांग्रेस को इस उम्मीद के साथ समर्थन देने की घोषणा करता हूं.यदि वह सत्ता में आती हैं तो अपने वादों को पूरा करेगी।

हमें सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट रहना है। मौलाना बुखारी ने 2012 के उत्तर प्रदेश चुनाव में सपा को समर्थन दिया था लेकिन आज उन्होंने सपा और बसपा दोनों को अवसरवादी राजनीति करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि सपा मुस्लिमों को संरक्षण करने में असफल रही है। पिछले साल सितम्बर में मुजफ्फरनगर दंगों में 60 लोग मारे गए थे और हजारों को अपना घरबार छोडऩा पड़ा। बसपा के संबंध में मौलाना बुखारी ने कहा कि चुनाव बाद वह भाजपा के साथ नहीं जायेगी। इसकी कोई गारंटी नहीं है।

शाही इमाम ने बिहार में लालू प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को समर्थन देने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि तृणमूल ने मुस्लिमों की भलाई के लिए काम किया है और पार्टी ने यह भी कहा है कि वह चुनाव के बाद भाजपा को समर्थन नहीं देगी। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य के लिए यह बहुत चुनौतीपूर्ण समय है और धर्मनिरेपक्ष वोटों का एकजुट रहना जरुरी है। धर्मनिरपेक्ष वोट किसी भी कीमत पर बंटने नहीं चाहिए। यह चुनाव धर्मनिरपेक्ष और सांप्रदायिक ताकतों के बीच हैं।

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