शमशान भूमि की मांग चुनावी मुद्दा

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Saturday, April 05, 2014-2:55 PM

नई दिल्ली (राजन शर्मा) : नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली सीट पर कांग्रेस-भाजपा और आप उम्मीदवारों में कड़े मुकाबले के असार हैं, लेकिन लोकसभा क्षेत्र के अंर्तगत आने वाली रोहणी विधानसभा में लोगों का गुस्सा भाजपा को नुक्सान पहुंचा सकता है।

ये विधानासभा रोहिणी भाजपा का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन वर्ष 2013 विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ लोगों का गुस्सा इस कदर फूटा की वरिष्ठ नेता और 4 बार से विधायक जयभगवान अग्रवाल को भारी मतों से हार का मुंह देखना पड़ा था।

यहां लोगों में गुस्सा लंबे समय से श्मशान भूमि के न होने के चलते है। यह गुस्सा अब चुनावी मुद्दे का रूप अख्तियार कर चुका है। 

चौड़ी सड़कें, पार्किंग, पेयजल और साफ-सफाई, बेहतर कानून व्यवस्था के लिए मशहूर रोहिणी क्षेत्र 200 से ज्यादा सोसाइटियां होने के चलते दिल्ली में अपनी अगल पहचान रखता है।

यहां जिस स्थानीय मुद्दे ने भाजपा को परेशान किया है, वह क्षेत्र में शमशान भूमि का न होना है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुक्सान उठाना पड़ा था। भाजपा इस मुद्दे को लेकर पशोपेश में है। 

लोगों की शिकायत है कि क्षेत्र में कोई श्मशान न होने से मृत लोगों को या निगमबोध घाट लेकर जाना पड़ता है या फिर खेतों में बने अस्थाई श्मशान में उनकी अंतिम क्रिया रसम करनी पड़ती है।

यहां स्थाई श्मशान घाट बना दिया जाय, तो मृत लोगों के लिए अंतिम क्रिया के लिए एक अदद जगह उपलब्ध हो जाएगी।

इसलिए सता रहा डर 

मृत लोगों की अंतिम क्रिया करने के लिए जगह न होने के चलते रोहिणी विधानसभा में विभिन्न सोसाइटियों ने यहां श्मशान की मांग लंबे समय कर रही थीं।

मांग अनदेखा करने से गत वर्ष विधानसभा चुनाव में लोगों ने यहां से भाजपा को बाहर कर दिया। मांग को लेकर कई बार स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चाबंदी भी की थी, जिनका डर अब भाजपा को सता रहा है।

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