खुदाई में मिली पाश्र्वनाथ की 16 सौ वर्ष पुरानी प्रतिमा

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Saturday, April 05, 2014-4:24 PM

रायपुर/राजिम: छत्तीसगढ़ के राजिम में पुरातत्व विभाग द्वारा की जा रही खुदाई में गुरुवार की शाम भगवान पाश्र्वनाथ की प्रतिमा मिली। यह प्रतिमा अष्टधातु की और सात फन वाली है। प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. अरुण शर्मा के अनुसार, यह प्रतिमा लगभग 16 सौ वर्ष से अधिक पुरानी है। प्रतिमा मिलने की खबर पाते ही जैन समाज के लोग उत्सुकता के साथ खुदाई होने वाले स्थान पर पहुंच गए। समाज के अध्यक्ष किशोर सिंघई, संरक्षक अशोक गंगवाल, वरिष्ठ सदस्य रमेश पहाडिय़ा, रमेश चौधरी सहित कई वरिष्ठों ने प्रतिमा को देख जैन मंदिर निकलने की संभावना व्यक्त की है।

जानकारी के मुताबिक, प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. अरुण शर्मा की देखरेख में 1 अप्रैल से राजीव लोचन मंदिर के समीप खुदाई कार्य प्रारंभ किया गया है। पिछले वर्ष भी शर्मा की देखरेख में खुदाई के दौरान मंदिर के अवशेष मिले थे, जिसमें शिवलिंग, जलहरि, मंदिर के स्तंभ जैसी अनेकों पौराणिक महत्व की चीजें निकली थीं। इस प्रारंभिक खुदाई के दौरान मात्र 10 से 30 इंच तक की खुदाई में ही दिगंबर मूर्ति भगवान पाश्र्वनाथ की प्रतिमा निकली। इसके साथ ही लोहे का तीर, मिट्टी की चुकिया, दीया, पानी छानने का छन्नी, लाख और शंख की चूडिय़ां, बच्चों के खेलने का कांच का कंचा, पत्थर की माला, तांबे का सिक्का, अंगूठी, नाक की नथनी, गले में पहनने की माला, परई एवं मिट्टी के छोटे-छोटे बर्तन प्राप्त हुए।

यह खुदाई राष्ट्रीय पुरातत्वविद अरुण शर्मा, छत्तीसगढ़ पुरातत्व के प्रभात सिंह, प्रवीण तिर्की के संरक्षण में खुदाई कार्य जारी है। खुदाई के दौरान मिली सामग्रियां इनके संरक्षण में रखी गई है। बताया गया है कि खुदाई के दौरान मिले सिक्के में एक तरफ त्रिशूल, दूसरी तरफ बहादुर सिंह दिख रहा है। सिक्के पर आधा पैसा लिखा हुआ है। पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार, यह सिक्का उस समय के स्थानीय राजाओं के राज्यचिह्न और नाम अंकित हो सकता है। लगातार खुदाई में प्राचीन काल के धातु और मूर्तियां मिलने से राजिम सहित समूचे अंचल में उत्सुकता का वातावरण बना हुआ है। इतिहासकार व पुरातत्ववेत्ता डॉ. एल.एस. निगम कहते हैं कि राजिम छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण पुरातत्व स्थल है। यहां से पाश्र्वनाथ की पाषाण प्रतिमा पूर्व में भी प्राप्त हुई थी। यहां से कांस्य प्रतिमा की प्राप्ति एक उपलब्धि कही जा सकती है।

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