राजनाथ के गांव के लोग ही उनसे नाराज

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Saturday, April 05, 2014-4:46 PM

चंदौली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष राजनाथ सिंह भले ही राजनीति के शिखर पर हों, मौजूदा आम चुनाव में भाजपा की भारी जीत का ढिंढोरा पीट रहे हों, लेकिन खुद उनके गांव के लोग ही उनसे नाराज हैं, और उनके क्षेत्र में भाजपा की लुटिया डूबती नजर आ रही है। गांव वालों का कहना है कि राजनाथ ने उनके लिए कुछ नहीं किया। 

चंदौली जिले का रामपुर भभौरा राजनाथ का पैतृक गांव है। यह गांव चंदौली संसदीय क्षेत्र में पड़ता है। इस सीट पर भाजपा ने कई बार जीत दर्ज कराई है, लेकिन राजनाथ के बारे में उनके गांव के लोगों की राय अच्छी नहीं है। रामपुर भभौरा की गरीब महिला दुजिया मुराई साफ शब्दों में कहती है, ‘‘राजनाथ हमारे गांव के जरूर हैं, लेकिन हम गरीबों की हालत पहले जैसी ही है।’’ दुजिया ने कहा कि राजनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बन चुके हैं, वह चाहते तो हम गरीबों की हालत सुधर जाती, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। 

राजनाथ के गृह क्षेत्र, चंदौली में 1998 के आम चुनाव के बाद से ‘कमल’ नहीं खिला है, और इस बार भी भाजपा उम्मीदवार महेंद्र नाथ पांडे मुकाबले से बाहर दिखाई दे रहे हैं। यहां समाजवादी पार्टी (सपा) के मौजूदा सांसद रामकिशुन यादव से लोग नाराज तो हैं, लेकिन राजनीतिक समीकरण के कारण फिर भी वह मुख्य लड़ाई में हैं।

राजनाथ भाजपा के अध्यक्ष हैं, लेकिन उनका यहां कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता। रामपुर भभौरा के निवासी अशोक चतुर्वेदी ने क्षेत्र में भाजपा की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि मौजूदा सांसद रामकिशुन यादव ने इस क्षेत्र में विकास के जरूरी काम नहीं करवाए, फिर भी वह मुख्य मुकाबले में हैं और भाजपा के उम्मीदवार लड़ाई में भी नहीं दिखाई देते। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रत्याशी महेंद्र पांडेय को मुख्य मुकाबले में आने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। 

बकौल अशोक, बसपा उम्मीदवार अनिल मौर्य को जातीय व दलीय मतों के आधार पर कम नहीं आंका जा सकता। चंदौली शहर के मुख्य बाजार में चाट का ठेला लगाने वाले नंदू का कहना है कि भाजपा को मोदी लहर ही उबार सकती है, लेकिन यह लहर भी अपने आप में संदेहास्पद है। नंदू ने कहा कि बसपा और सपा में सीधी टक्कर दिखती है। 

कांग्रेस ने यहां से तरुण पटेल को उम्मीदवार बनाया है और भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज चल रहे विधायक सुशील सिंह ने बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की मंशा जताई है। अगर ऐसा हुआ तो यहां लड़ाई बहुकोणीय हो जाएगी। चंदौली लोकसभा क्षेत्र में पंद्रहवीं लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो सपा से चुनाव लड़कर सांसद बने रामकिशुन यादव को 1,80,114 वोट मिले थे, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार कैलाशनाथ यादव 1,79,655 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे।

यहां पिछली बार 46.41 फीसदी मत पड़ा थाइसके पहले 1991, 1996 और 1998 में भाजपा उम्मीदवार आनंदरत्न मौर्य ने यहां से जीत दर्ज कराई थी, लेकिन 1999 में सपा के जवाहरलाल जायसवाल, 2004 में बसपा के कैलाशनाथ यादव एवं 2009 के चुनाव में सपा के रामकिशुन यादव ने जीत दर्ज कराई थी। इस संसदीय क्षेत्र में कमोवेश मुद्दे स्थानीय हैं, लेकिन भ्रष्टाचार व महंगाई से भी लोग परेशान हैं। इन सबके बावजूद व्यक्तित्व की लड़ाई भी परवान पर है, इसलिए माना जा रहा है कि यहां बहुकोणीय मुकाबला हो सकता है। 

इस संसदीय क्षेत्र में अब तक निर्वाचित हुए सांसदों पर नजर डालें तो 1952 व 1957 में कांग्रेस के त्रिभुवन नारायण सिंह, 1962 में कांग्रेस के बालकृष्ण सिंह, 1967, 1977 व 1980 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के निहाल सिंह, 1971 में कांग्रेस के सुधाकर पांडेय, 1984 में कांग्रेस की चंद्रा त्रिपाठी, 1989 में जनता दल के कैलाशनाथ सिंह यादव, 1991, 1996, 1998 में भाजपा के आनंदरत्न मौर्य, 1999 में जवाहरलाल जायसवाल (सपा), 2004 में बसपा के कैलाशनाथ सिंह यादव व 2009 में सपा के रामकिशुन यादव सांसद चुने गए।

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