जागरूक है मुसलमान,अपील की जरूरत नहीं

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Sunday, April 06, 2014-12:13 PM

नई दिल्ली (वसीम सैफी): सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद अहमद बुखारी का मुसलमानों को कांग्रेस को वोट देने की अपील का चौतरफा विरोध हो रहा है। उनके छोटे भाई याह्या बुखारी ने भी उनका कड़ा विरोध किया है। बड़ी बात तो यह है कि जामा मस्जिद पुरानी दिल्ली के लोग ही अहमद बुखारी के इस ब्यान से इत्तेफाक नहीं रखते। दिल्ली के अन्य इलाकों में रहने वाले मुसलमानों की भी यही राय है।
अधिकांश मुसलमानों का कहना है कि वह अहमद बुखारी की अपील के मोहताज नहीं हैं। उनमें खुद इतना विवेक है कि वह अपने लिए अच्छा नुमाइंदा चुन सकते हैं। अगर वह कांग्रेस को वोट करतें हैं तो अहमद बुखारी यह न समझे की वह उनके कहने पर कांग्रेस को वोट कर रहे हैं। क्षेत्र के कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि अहमद बुखारी साहब का क्या है। कभी सपा की बात करतें हैं, कभी बीएसपी की। एक समय में वह मुसलमानों से भाजपा के लिए भी समर्थन की बात कर चुके हैं। लेकिन अब घूम-घाम कर कांग्रेस पर आ टिके हैं। अगली पार्टी न जाने कौन सी होगी। जिसके लिए वह समर्थन की अपील करेंंगे।
पुरानी दिल्ली रकाब गंज निवासी हाजी शमशुद्दीन का कहना है कि कांग्रेस ने मुसलमानों को कोई फायदा नहीं पहुंचाया। लेकिन वह मोदी का घमंड और गुरूर तोडऩे के लिए कांग्रेस को वोट करेंगे, न कि अहमद बुखारी के कहने पर।सुईं वालान निवासी मुज्जफर हसन का कहना है कि एक समय था जब लोग जामा मस्जिद शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी के ऐलान को तवज्जो देते थें। जिस किसी भी पार्टी के लिए उन्होंने ऐलान कर दिया सभी मुसलमान एकमत होकर वहीं वोट करते थे। लेकिन अब वह दौर खत्म हो चुका है। मुसलमान जागरूक है कि उसे कहां और किस पार्टी के लिए वोट करना है वह सब जानते हैं। जाफराबाद निवासी मुनव्वर का कहना है कि पहली बार अहमद बुखारी ने विवेक की बात की है। मुसलमान कम से कम इस आम चुनाव में भाजपा को कतई भी वोट नहीं देगा। ऐसे में दिल्ली में मुसलमानों के सामने आप और कांग्रेस नजर आती हैं।

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