वृद्धाश्रम कांड: कारण संपत्ति विवाद तो नहीं

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Sunday, April 06, 2014-2:18 PM

नई दिल्ली (कुमार गजेन्द्र): वसंत कुंज इलाके में स्थित एक ओल्डेज होम में वीरवार देर रात लगी आग के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।  पुलिस की जांच कई कोण से की जा रही है। पुलिस मुख्य रूप से वसंत कुंज स्थित  अरबों रुपए की इस प्रॉपर्टी पर कब्जा जमाए जाने और इस प्रॉपर्टी को कब्जाने के कोण से जांच करेगी। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आग कैसे लगी? आग शुरू कहां से हुई थी। 

दिल्ली पुलिस उपायुक्त भोला शंकर जयसवाल ने भी माना है कि वृद्ध आश्रम आग लगने के पीछे साजिश भी हो सकती है। बताया जाता है कि इस प्रॉपर्टी को लेकर पहले भी कई तरह के झगड़़े होते रहे हैं।

पुलिस की मानें तो घटना के वक्त ओल्डेज होम में करीब 150 लोग मौजूद थे और सभी गहरी नींद में सो रहे थे। जिनमें से  रमेश (60)और  पूनम (27) की जलने से दर्दनाक मौत हो गई। पूनम का एक पैर कटा हुआ था, जिस कारण वह आग से चाह कर भी नहीं बच पाई। आश्रम के अध्यक्ष रवि कालरा का कहना है कि यहां बुजुर्ग, कुछ मानसिक रोगी और अन्य लोग रह रहे हैं।
 
 सूत्रों की मानें तो वसंत कुंज इलाके के ग्रीन एवेन्यू रोड पर फार्म हाउस नंबर 34, डी ब्लॉक चर्च के पास स्थित है। यहां लंबे समय से अस्थायी तौर पर बांस की बल्लियों से टेंट लगाकर इस आश्रम का रूप दिया गया है। इस संचालन  द अर्थ  सेवियर्स फाऊंडेशन (टी.ई.एस.एफ.) नाम की  एन.जी.ओ. कर रही है।

 वसंत कुंज इलाके में जब यह फार्म हाऊस बनाया गया था, उस वक्त यहां जमीन की कीमत ज्यादा नहीं थी लेकिन हाल ही के कुछ वर्षों में इस इलाके में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। यही कारण है कि अरबों रुपए की इस प्रॉपर्टी पर इस इलाके के कई बड़े बिल्डरों की नजर है। पुलिस का मानना है कि आग के पीछे इनमें से ही कोई बिल्डर हो सकता है?


पुलिस का कहना है कि बीते वर्ष भी यह आश्रम चर्चाओं में था। जब लीज समाप्त होने पर यहां रहने वाले बुजुर्गों ने सड़क पर रात गुजारी थी। एन.जी.ओ. के फाऊंडर रवि कालरा ने बताया कि वह 2008 से यहां वृद्ध आश्रम का संचालन कर रहे हंै। जिस जमीन पर यह बनाया गया था वह सुखबीर सिंह नामक व्यक्ति की है। एन.जी.ओ. ने उसे 5 साल की लीज पर लिया हुआ था। हर माह किराए के रूप में एनजीओ 65 हजार रुपए अदा करती थी। गत वर्ष अक्टूबर माह में प्लॉट की लीज समाप्त होने पर यहां रह रहे बुजुर्गों को जबरन आश्रम से बाहर निकाल दिया गया था और उन्हें एक रात सड़क पर भी बितानी पड़ी थी। एक रात सड़क पर गुजारने के बाद 2 अक्टूबर को 120 बुजुर्गों को नरेला के सेवा सदन में भेजा गया था। 


नरेला के लामपुर स्थित सेवा सदन में भेजे गए बुजुर्गों में से 5 की अचानक तबियत बिगड़ गई थी। तबीयत बिगडऩे पर उन्हें राजा हरीश चंद्र अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उनका इलाज कर वापस सेवा सदन भेज दिया गया था। सदन में कुछ देर बाद शेर सिंह (50) नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद ही लामपुर सेवा सदन सुॢखयों में आया था।

सेवा सदन के अध्यक्ष सुरेश कुमार है और अर्थ सेवियर्स फाऊंडेंशन के  प्रेसीडैंट रवि कालरा ने इस घटना में किसी के द्वारा जानबूझकर अंजाम दिए जाने की घटना से इंकार किया है। उनका कहना है कि आश्रम के लिए जौनपुर में जमीन देख ली गई थी और कुछ दिन बाद ही सभी लोगों को वहां शिफ्ट किया जाना था।

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