बच्चे के हित से बड़ा नहीं हो सकता देश का कानून

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Sunday, April 06, 2014-3:03 PM

नई दिल्ली (मनीषा खत्री): एक भारतीय महिला ने एक मलेशिया निवासी से विवाह किया और कुछ समय बाद एक बच्चे को जन्म दिया, परंतु बाद में इस दम्पति में विवाद हुआ और दोनों का तलाक हो गया जिसके कारण यह महिला तो भारत वापिस आ गई लेकिन उसके व उसके बच्चे के रिश्ते के बीच में सरहदें बाधा बन गई।


वह अपने बच्चे को अपने साथ भारत लाना चाहती थी, परंतु मलेशिया सरकार ने इस बच्चे की नागरिकता खत्म करने से इंकार कर दिया और इस कारण भारत सरकार ने इस बच्चे को अपनी नागरिकता देने से मना कर दिया। अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने मां व बच्चे के रिश्ते के बीच आई सरहदों की दीवार को गिराते हुए भारत सरकार से कहा है कि वह फिलहाल इस बच्चे को सशर्त नागरिकता दे दें।

जब बच्चा 21 साल का हो जाएगा तो उसके बाद 6 महीने के भीतर वह किसी एक देश की नागरिकता का चुनाव कर लेगा। न्यायमूॢत मनमोहन की खंडपीठ ने कहा कि जिस बच्चे ने अभी तक देश-दुनिया तो छोड़ों अपने माता-पिता के रिश्ते तक को नहीं समझा है, उस बच्चे को सरहदों के कानून के चलते अपनी मां से अलग नहीं किया जा सकता है। अदालत ऐसे मामलों में बच्चों के हित को देखती है। किसी भी बच्चे के हित से बड़ा किसी देश का कानून नहीं होता है।


अदालत ने यह आदेश बच्चे की मां की तरफ से दायर याचिका पर दिया है। मां व बच्चे को राहत देते हुए न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार बच्चे को कानून के विशेष प्रावधानों के तहत कंडीशनल सिटीजनशिप (सशर्त नागरिकता) प्रदान करे। जो कि इस बच्चे के 21 साल की उम्र तक मान्य होगी। साथ ही केंद्र से कहा है कि वह अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करें। अब इस मामले में 15 जुलाई को सुनवाई होगी।


महाराष्ट्र के पुणे शहर निवासी एक महिला इस मामले में याचिका दायर करते हुए बताया था कि उसकी शादी 26 अगस्त 2006 में मलेशिया के एक निवासी से हुई थी। 29 जुलाई 2007 को उसने मलेशिया में एक बेटे को जन्म दिया, परंतु बाद में उसका अपने पति से विवाद हो गया जिस कारण अप्रैल 2008 में वह भारत लौट आई।


26 अक्तूबर 2010 को उसने अपने बेटे को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष अप्लाई किया। उसे कहा गया था कि वह मलेशिया सरकार के समक्ष अपने बेटे की वहां की नागरिकता छोडऩे के लिए अप्लाई कर दे।


उसने ऐसा कर दिया परंतु बाद में भारत सरकार ने कहा कि वहां की नागरिकता छोडऩे का प्रमाण पत्र भी जमा कराओ लेकिन मलेशिया देश की ओर से बच्चे की नागरिकता को खत्म करने से इंकार कर दिया गया। उसे कहा गया कि बच्चे की उम्र 21 वर्ष की होने तक वे उसकी नागरिकता समाप्त नहीं कर सकते।

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