मां पर तेजाब फैंकने वाले को उम्रकैद

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Sunday, April 06, 2014-3:12 PM

नई दिल्ली(मनीषा खत्री): ऐसे इंसान के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती है,जिसने खुद अपनी जन्मदाता का विनाश कर दिया। यह सच है कि अभियुक्त की एक पत्नी व बच्चा है, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी उस पर है, परंतु 17 साल पहले यह जिंदगी उसने खुद अपने लिए चुनी है, इसलिए उसे उम्रकैद की सजा काटनी ही होगी।

यह टिप्पणी करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस अभियुक्त जितेंद्र को राहत देने से मना कर दिया, जिसने प्रॉपर्टी विवाद के चलते अपनी मां पर तेजाब फैंक दिया था। मां पर तेजाब फैंकने के कारण उसकी मौत हो गई थी। निचली अदालत ने इस अभियुक्त को 29 मई 1999 को उम्रकैद व 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी थी। जिसे उसने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।


न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता ने कहा कि इस मामले में 2 अहम गवाह अपने बयान से मुकर गए थे। यह गवाह कोई और नहीं बल्कि अभियुक्त का पिता व भाई हैं। ऐसे में उनके द्वारा बयान बदलने का कारण समझा जा सकता है क्योंकि एक पिता को लगा होगा कि उसने अपनी पत्नी को तो पहले ही खो दिया है,ऐसे में अब वह अपने बेटे को नहीं खोना चाहता होगा, परंतु मृतका द्वारा मरने से पहले दिए गए बयान व अन्य तथ्यों के आधार पर केस पूरी तरह साबित हो रहा है।

ऐसे में खुद अपने बेटे के हाथों इतनी जघन्य अपराध की शिकार हुई पीड़िता की आत्मा को न्याय देने के लिए पर्याप्त तथ्य अदालत के समक्ष उपलब्ध हैं, इस मामले में अभियोजन पक्ष अपना आरोप साबित करने में पूरी तरह कामयाब रहे हैं, इसलिए अभियुक्त को कोई राहत नहीं दी जा सकती है।


पुलिस के अनुसार अभियुक्त व उसकी मां माया देवी के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। वह अपनी मां से बार-बार कह रहा था कि वह उनका घर उसके नाम करवा दें। 9 अगस्त 1997 को सुल्तानपुरी स्थित अपने घर में माया देवी बैठी थी। उसी समय अभियुक्त आया और उससे कहा कि वह घर उसके नाम करवा दें,अन्यथा उसे इसका परिणाम भुगतना होगा। जब माया देवी ने ऐसा करने से मना कर दिया जो वह एक जग में तेजाब भरकर लाया और अपनी मां पर डालकर भाग गया। माया देवी के पति व दूसरे बेटे ने उसे डी.डी.यू. अस्पताल में भर्ती कराया।

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