मतदाता शिकायत के लिए स्वतंत्र, लेकिन झूठे दावे पर हो सकती है कार्रवाई

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Monday, April 07, 2014-12:54 AM

नई दिल्ली: यदि ‘पेपर ट्रेल’ का परिणाम दिए गए मत से मेल नहीं खाता तो मतदाता शिकायत दर्ज करा सकते हैं, लेकिन दावा झूठा पाए जाने पर उन्हें दंडात्मक कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। चुनाव आयोग ई.वी.एम. में दर्ज मतों के कागजी रिकॉर्ड (पेपर ट्रेल) के लिए प्रिंटर्स की अवधारणा लाने के लिए पहले ही नियमों में संशोधन कर चुका है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि प्रिंटर से निकली पर्ची में मतदाता द्वारा अपनी पसंद के उम्मीदवार को दिए गए वोट के विपरीत दूसरे उम्मीदवार का नाम और चुनाव निशान दिखता है तो मत देने वाला इसकी शिकायत दर्ज करा सकता है। औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराने के लिए मतदाता को एक घोषणापत्र भरना होगा और उसे यह दिखाने के लिए एक प्रयोग मत देना होगा कि उसका आरोप ‘सही एवं वास्तविक’ है लेकिन शिकायत झूठी पाए जाने की स्थिति में भादंसं की धारा 177 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘लेकिन प्रावधान के तहत कार्रवाई विरले ही होगी क्योंकि हम उन लोगों को शिकायत दर्ज कराने में भयभीत नहीं करना चाहते जो यह पाएं कि ई.वी.एम. त्रुटिपूर्ण ढंग से मत दर्ज कर रही है।’’ घोषणा पर शिकायतकत्र्ता को हस्ताक्षर करने होंगे जिसमें भादंसं की धारा 177 के तहत 6 महीने तक की कैद और 1,000 रुपए तक के जुर्माने की सजा के प्रावधान का उल्लेख होगा। चुनाव आयोग 9 चरणों में 543 लोकसभा सीटों के लिए कल से शुरू हो रहे चुनावों में कई सीटों पर ‘पेपर ट्रेल’ प्रणाली का इस्तेमाल करेगा।

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