संदीप की लगेगी हैट्रिक या गांधी-गिरी से खेल होगा खराब

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Monday, April 07, 2014-11:01 AM

नई दिल्ली : पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट इस बार खासी दिलचस्प होने वाली है। यूं तो नामांकन के मामले में पूर्वी दिल्ली सबसे आगे है। यहां से 40 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। मगर यह मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है। यहां कांग्रेस, भाजपा और आप की टक्कर में ऊंट किस करवट बैठता है, यह मतगणना में ही तय हो पाएगा।

इस सीट पर लगातार 2 बार के सांसद संदीप दीक्षित जहां एक तरफ अपनी हैट्रिक लगाने के लिए चुनाव मैदान में हैं, तो उन्हें टक्कर देने के लिए भाजपा की तरफ से अध्यात्म के रास्ते राजनीति में आने वाले महेश गिरी और आम आदमी पार्टी की टिकट पर महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी हैं। कांग्रेस जहां विकास के नाम पर वोट मांग रही है, तो भाजपा बदलाव के नाम पर, वहीं दिल्ली के विधानसभा चुनाव में उभरकर सामने आई आम आदमी पार्र्टी भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस और भाजपा को चुनौती दे रही है।

पूर्वी दिल्ली लोकसभा के क्षेत्रफल के हिसाब से यहां की 10 विधानसभा सीटों पर नजर डालें तो पिछले चुनाव में यहां सबसे आगे आम आदमी पार्टी (आप) रही थी। आप को यहां 5, भाजपा के खाते में 3 और कांग्रेस को केवल 2 सीटें नसीब हुई थीं। विकास के नाम पर संदीप दीक्षित लोगों से वोट मांग रहे हैं, तो भाजपा इसी दौरान हुए भ्रष्टाचार और संदीप दीक्षित के क्षेत्र में नहीं रहने के नाम पर वोट मांग रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों को मौसेरा भाई बताते हुए आम आदमी पार्टी इस बार बदलाव के रूप में नई पार्टी को वोट देने की मांग कर रही है।


बहुजन समाज पार्टी की ओर से मुस्लिम कार्ड खेलते हुए पुराने कांग्रेसी शकील सैफी को टिकट दिया गया है। शकील सैफी यहां कांग्रेस और आप का खेल बिगाड़ सकते हैं। अभी तक के चुनाव में मुस्लिम वोट कांग्रेस को जाता रहा है, जो विधानसभा चुनाव में आप की तरफ गया था। ऐसे में शकील सैफी से दोनों को ही नुक्सान उठाना पड़ सकता है।


पूर्वी दिल्ली सीट जातीय समीकरणों के लिहाज से भी काफी दिलचस्प मानी जा रही है। इस सीट पर पंजाबी, ब्राह्मण, गुर्जर और मुस्लिम वोटर अच्छी खासी तादाद में हैं। अभी तक गुर्जर और मुस्लिम वोटरों पर अपना एकछत्र राज समझने वाली कांग्रेस को विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी जमाने में कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर कांगे्रस के पास महज 2 विधानसभा सीटें हैं। भाजपा की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं है।

भाजपा के पास कांगे्रस से बस एक सीट ज्यादा है। भाजपा की टिकट पर बाहरी प्रत्याशी का उतारना भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। गरीब व मजबूर लोगों की लड़ाई लडऩे का दम भरने वाली आप की ओर से मैदान में मौजूद प्रत्याशी को भी भारी समर्थन मिल रहा है। राज मोहन गांधी को उनकी स्वच्छ छवि, पार्टी और खुद के साथ गांधी नाम जुडऩे का काफी फायदा मिल रहा है। अब ऐसे में देखना यह है कि आने वाले चुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है क्योंकि तीनों ही प्रत्याशी एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

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