मतदान के अधिकार से वंचित मुस्लिम महिलाएं

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Tuesday, April 08, 2014-12:30 PM

नई दिल्ली (वसीम सैफी): देश रूढ़ीवादी बंधनों को तोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है। इस योगदान में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। वर्तमान में महिलाएं देश के नुमाइंदों को चुनने से लेकर देश चलाने तक महत्वपूर्ण योगदान निभा रही हैं लेकिन इस मामले में मुस्लिम समुदाय की महिलाएं अभी पिछड़ी हुई हैं, अधिकांश महिलाएं तो अपने मतदान के अधिकार का उचित इस्तेमाल तक नहीं करती हैं।

वह अपनी इच्छा से किसी पार्टी को वोट करने की बजाए वहां मतदान करती हैं जहां घर के पुरुष वोट डालते हैं या उनसे वोट डालने के लिए कहते हैं। वह पुरुषों के पीछे आंख मूंदकर वहीं वोट डाल आती हैं। यह दशा देश की किसी गांव-देहात में रहने वाली महिलाओं की नहीं बल्कि राजधानी दिल्ली में रहने वाली महिलाओं की है।

दिल्ली में मुसलमानों की लगभग 1 करोड़ 78 लाख 38 हजार 842 आबादी है। सबसे अधिक उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 27 फीसदी, पूर्वी   दिल्ली में 20 फीसदी, चांदनी चौक में 15 फीसदी और मध्य दिल्ली में करीब 10 फीसदी मुस्लिम हैं। दिल्ली में कुल 11.7 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। जिनमें आधे से कुछ कम महिला वोटर शामिल हैं लेकिन अधिकांश महिलाएं चुनावों में स्वतंत्र होकर वोट नहीं करतीं।
 
जहां पिता, भाई या पति वोट करते हैं वह भी वहीं वोट डालना अपना कर्तव्य समझती हैं। इस तरह वह अपने मतदान के अधिकार से वंचित रह जाती हैं। हालांकि मुस्लिम समुदाय में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जो मतदान के अधिकार का स्वतंत्र होकर इस्तेमाल करती हैं। उनका मानना है कि अन्य मुस्लिम महिलाओं को भी स्वतंत्र होकर इस अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए।अधिवक्ता एवं कांग्रेसी नेता इशरत जहां का कहना है कि अधिकांश महिलाएं अपने मतदान के अधिकार का उचित इस्तेमाल नहीं कर पातीं।
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