रायपुर में मिला दुर्लभ डेजर्ट जुब्रिल चूहा

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Tuesday, April 08, 2014-3:25 PM

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित सबसे बड़े खैराती अस्पताल मेकाहारा में चूहा मारने वाली टीम को दुर्लभ प्रजाति के चूहे मिले हैं। टीम हैरान है कि यह चूहा यहां कैसे आ गया? दरअसल, बेंडी कूट या डेजर्ट जुब्रिल प्रजाति का यह चूहा ज्यादातर जंगल में ही मिलता है। इस प्रजाति के चूहे सुरंग बनाने में माहिर होते हैं और एक रात में ही लगभग 250 फीट तक जमीन खोद सकते हैं। पिछले तीन दिन की कार्रवाई में पकड़े गए चूहों में से लगभग 17 चूहे इस प्रजाति के हैं। यहां के अंबेडकर अस्पताल में इन दिनों चूहामार अभियान चल रहा है।

 

अस्पताल प्रबंधन ने इंदौर की संस्था लक्ष्मी फ्यूमिगैशन एंड पेस्ट कंट्रोल लिमिटेड को इसका ठेका दिया है। यह संस्था 1994 से लगातार चूहों पर काम कर रही है। चूहा मारने का काम देख रही कंपनी के चेयरमैन डॉ. संजय कर्मकर ने बताया, ‘‘मैं पिछले 28 साल से चूहों पर काम कर रहा हूं, यह पहला मौका है जब किसी संस्थान में इस प्रजाति का चूहा मिला है।’’

उन्होंने बताया कि 31 मार्च को अस्पताल के निरीक्षण के दौरान ही एक बार लगा था कि यहां इस प्रजाति के चूहे मिल सकते हैं, लेकिन सच में मिल जाएंगे, यह यकीन नहीं था। ये काफी खतरनाक प्रवृत्ति के होते हैं और मानव मांस भी खा सकते हैं। डॉ. कर्मकर ने कहा कि बेंडी कूट प्रजाति के चूहों के दांत 4 से 5 इंच तक लंबे होते हैं। ये काफी नुकीले होते हैं, जिनका प्रयोग ये सुरंग खोदने के लिए करते हैं। अभी तक चूहा मार अभियान अस्पताल परिसर में ही चलाया जा रहा है। टीम अभी तक अस्पताल के भीतर नहीं गई है।

डॉ. कर्मकर ने बताया कि अस्पताल के अंदर बहुत संख्या में गहरी सुरंग हैं। यहां बेंडी कूट प्रजाति के और भी चूहे मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में इन चूहों को मारा जाएगा। बहरहाल, प्रदेश में अपनी तरह के इस पहले बड़े चूहामार अभियान को लेकर पूरे देश में चर्चा है।

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