महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत वहीदा परिज्म खान

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Sunday, March 08, 2015-12:48 PM
नारी एक ऐसा शबद जिसे कभी समाज छोटा और कमजोर समझता था। एक ऐसा वर्ग जिसे वर्षों से दूसरे वर्ग द्वारा दबाया जाता रहा है। लेकिन समय के साथ- साथ अपनी क्षमताओं और हौसलों से महिला वर्ग ने यह साबित कर दिखाया है कि महिलाएं भी पुरुषों से कम नहीं ।
 
जी हां, आज के इस दौर में महिलाओं का ही बोलबाला है चाहे बात हो डॉक्टर ,इंजीनियर की या फिर चांद पर पहंचने वाली कल्पना चावला की। महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषोंं के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलती हैं।
 
महिलाओं के संदर्भ में राष्ट्र निर्माता स्वामी विवेकानंद के कहा था -किसी भी राष्ट्र की प्रगति का सर्वोत्तम थर्मामीटर है वहां की महिलाओं की स्थिति हमें नारियों को ऐसी स्थिति में पहंचा देना चाहिए ,जंहा वो अपनी समस्याओं को अपने ढंग से स्वयं सुलझा सकें। हमें नारी शक्ति के उद्धारक नहीं बल्कि उनके सेवक और सहायक बनना चाहिए।
 
आज की महिलाओं में एक नया जुनून है आंखों में बड़े-बडे सपने हैं कुछ कर दिखाने के। उदाहरणत: भारतीय नौसेना की बात करें तो वहीदा परिज्म खान ऐसी महिला हैं जो कि एक पहली कश्मीरी महिला नेवी अफसर हैं वहीदा जम्मू कश्मीर के राजोरी जिला के थाना मंडी की रहने वाली हैं। परिवार का पूरा साथ होने साथ-साथ दिल में जज्बा लिए वहीदा आगे बढ़ती रही और मैडिकल की पढ़ाई पूरी कर भारतीय नौसेना में शामिल हो गई। वहीदा ने यह साबित कर दिखाया कि एक महिला होने के बावजूद उसने अपने सपनों पूरा किया। एक ऐसा सपनाप जो वह हमेशा से संझोए हुए थी।
 
वहीदा एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं लेकिन अपने पक्के इरादों ओर अपने गुणों के कारण आज वो एक जल सेना में उंच पद पर तैनात हैं महिलाओं को मौका मिले तो वह भारतीय सरकार ने भी महिलाओं को बढावा देने के लिए लड़की पढ़ाओ योजना शुरू की है। अगर नारी पढ़ी लिखी और सक्षम होगी तो देश का भविष्य भी उज्जवल होगा।
जब नारी में है शक्ति सारी
फिर क्यों हो नारी बेचारी
वहीदा ने एक और कामयाबी हासिल की, उनकी सफलता की यह कहानी बच्चों को प्रेरित करने के लिए कक्षा छठीं की पुस्तक में शामिल की गई।
-रुपिंदर 
 
 
 
 
 
 
कल्पना चावला
 
 
भारत की बेटी-कल्पना चावला करनाल, हरियाणा, भारत. में एक हिंदू भारतीय परिवार में पैदा हुई थीं। उनका जन्म १ जुलाई सन् १९६१ मे एक भारतीय परिवार मे हुआ था। उसके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम संजयोती था | 
शिक्षा
कल्पना जी को हवाईजहाज़ों, ग्लाइडरों व व्यावसायिक विमानचालन के लाइसेंसों के लिए प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक का दर्ज़ा हासिल था। 
। अन्तरिक्ष यात्री बनने से पहले वो एक सुप्रसिध नासा कि वैज्ञानिक थी। आगे की शिक्षा वैमानिक अभियान्त्रिकी में पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़, भारत से करते हुए १९८२ में अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त की 
काँग्रेशनल अंतरिक्ष पदक के सम्मान,नासा अंतरिक्ष उड़ान पदक ,नासा विशिष्ट सेवा पदक,YASH awards
 
 
नारी... के कई रूप हैं. नारी जननी है.. मार्गदर्शिका है.. बेटी है..बहन है.. प्रेमिका है, पत्नी है और सबसे बढ़कर एक बहुत प्यारी दोस्त भी है। नारी तो देवी है। प्रकृति की एक बेहद ही खूबसूरत रचना नारी के बारे में सदियों से बहुत कुछ लिखा जा चुका है। 8 मार्च को महिला दिवस है। पूरा विश्व इस दिन महिलाओं को सम्मान देगा लेकिन भारत में तो नारी की पूजा ही होती है।
यह वो आम महिला हैं जिन्होंने अपने दम पर अपने ख्वाबों को पूरा किया और भारत को गौरवान्वित किया। जिनकी बात हम कर रहे हैं उनके बारे में पढ़कर आप सब की छाती भी चौड़ी हो जायेगी। 
आप भी गर्व से कहेंगे वाकई यह भारत की बेटी हैं... जिसके आगे सिर नतमस्तक हो जाता है। आईये पूरे देश के साथ भारत मां की इन होनहार बेटियों को याद भी करें और सलाम भी।
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