बाबरी बरसी: 24 साल बाद भी सिसक रही अयोध्या, 2000 से अधिक लोगों की हुई थी मौत

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Tuesday, December 06, 2016-9:39 PM

नई दिल्ली: बाबरी मस्जिद आज की 24वीं बरसी है। आज ही के दिन अयोध्या में इतना खून बहा था कि भगवान राम भी कटघरे में बंद हो गए। उसके बाद से वहां हिंदू और मुस्लिम एक-दूसरे के कट्टर विरोधी बने हुए हैं। करीब 24 साल पहले तोड़ी गई बाबरी मस्जिद आज भी भारतीय राजनीति और समाज में एक संवेदनशील टॉपिक है। अयोध्या विवाद ने कई दशकों तक देश की राजनीति को प्रभावित किया है लेकिन ये विवाद भी एक दिन में पैदा नहीं हुआ था।

हजारों कार सेवकों की उन्‍मादी भीड़ ने 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी ढांचा को ध्‍वस्‍त कर दिया। इसकी सुरक्षा की जिम्‍मेदारी तत्‍कालीन राज्‍य सरकार ने ली थी लेकिन वह इसे पूरा नहीं कर सकी। इस घटना को 24 बरस गुजर गए हैं लेकिन आज भी इस मुद्दे की गूंज भारत की राजनीति में सुनाई देती है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुंबई और दिल्ली सहित कई प्रमुख भारतीय शहरों में  दंगों में 2,000 से अधिक लोग मारे गए थे।

क्या है राम मंदिर आंदोलन?
राम मंदिर मुद्दा 1989 के बाद अपने उफान पर था। इस मुद्दे की वजह से तब देश में साम्प्रदायिक तनाव फैला था। देश की राजनीति इस मुद्दे से प्रभावित होती रही है। हिंदू संगठनों का दावा है कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर बाबरी मस्जिद बनी थी। मंदिर तोड़कर यह मस्जिद बनवाई गई थी। जबकि देश के मुसलमानों की पाक बाबरी मस्जिद भी विवादित स्थल पर स्थित है। भारत के प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर 1527 में इस मस्जिद का निर्माण किया गया था। बाबर ने अपने जनरल मीर बांकी को क्षेत्र का वायसराय नियुक्त किया। मीर बांकी ने अयोध्या में वर्ष 1528 में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया। इस बारे में कई तह के मत प्रचलित हैं कि जब मस्जिद का निर्माण हुआ तो मंदिर को नष्ट कर दिया गया या बड़े पैमाने पर उसमें बदलाव किएगए।

कई वर्षों बाद आधुनिक भारत में हिंदुओं ने फिर से राम जन्मभूमि पर दावे करने शुरू किये जबकि देश के मुसलमानों ने विवादित स्थल पर स्थित बाबरी मस्जिद का बचाव करना शुरू किया। प्रमाणिक किताबों के अनुसार पुन: इस विवाद की शुरुआत सालों बाद वर्ष 1987 में हुई। वर्ष 1940 से पहले मुसलमान इस मस्जिद को मस्जिद-ए-जन्मस्थान कहते थे, इस बात के भी प्रमाण मिले हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिरा दिया गया था। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।


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