200 गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान बनी मोटरसाइकिल एंबुलेंस!

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Tuesday, August 23, 2016-7:08 PM

नई दिल्लीः छत्तीसगढ़ के जंगलों में बसे गांववालों के लिए मोटरसाइकिल एंबुलेंस किसी वरदान से कम नहीं है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते, संकरी गलियों वाले छत्तीसगढ़ के जंगलों में बसे इस गांव के लाेगाें काे एक वर्ष पहले तक आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा बमुश्किल ही मिलती थी। लेकिन, यूनिसेफ और राज्य के स्वास्थ्य विभाग की पहल पर बनी खास मोटरसाइकिल एंबुलेंस की वजह से अब लाेगाें का अासानी से इलाज हाे रहा है। वर्ना गांव में मरीज इलाज के अभाव में ही दम ताेड़ देते थे। 

लेकिन अब इस मोटरसाइकिल एंबुलेंस से सबसे ज्यादा फायदा गर्भवती महिलाओं को हुआ है, जो अब प्रसव के लिए समय पर अस्पताल पहुंच पाती हैं। इस अनूठे आविष्कार की वजह से बस्तर के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में बीते एक वर्ष में 200 गर्भवती महिलाओं की जान बचाई जा चुकी है। जिले में गर्भवती महिलाओं की मौत और शिशु मृत्यु दर में दर्ज की गई और इसमें मोटरसाइकिल एंबुलेंस ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यही वजह है कि एंबुलेंस के इस छोटे रूप की चर्चा आजकल देश-विदेश में हो रही है। इस मोटरसाइकिल एंबुलेंस का कंसेप्ट अफ्रीकी देशों में भी अपनाया जा रहा है। खास तरीके से बनाए गए इस मोटरसाइकिल एंबुलेंस में मोटरसाइकिल को साइड कैरेज के साथ जोड़ा गया है। इसके भीतर स्ट्रेचर बनाया गया है और उसे हरे कपड़े से ढंका गया है। इस एंबुलेंस पर नीली बत्ती भी लगाई गई है। इसके चालक को प्राथमिक चिकित्सा यानी फर्स्ट एड का भी प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वह रास्ते में मरीज को जरूरत के मुताबिक दवाइयां भी मुहैया करा सके।

यूनिसेफ और राज्य के स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से तैयार की गए इस एंबुलेंस को बनाने में लगभग एक लाख 70 हजार रुपए की लागत आई है, जबकि इसके रख-रखाव और ईंधन पर महीने भर में 15 हजार रुपए का खर्च आता है। इस प्रयास को ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए उपयोगी बनाने के लिए मोटरसाइकिल एंबुलेंस के आकार और प्रकार को उन्नत करने की कोशिशें जारी हैं। 

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