पंजाब में फैल रहा है यह कैंसर, सरकार ने लड़कियों के लिए उठाया अहम कदम

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Thursday, December 15, 2016-8:27 AM

चंडीगढ़(रवि) : पंजाब में कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या एक गहन चिंता का विषय है। पंजाब में लोग कई तरह के कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं को हाने वाले ब्रैस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की है। हालांकि ब्रैस्ट कैंसर का पता पहले नहीं लगाया जा सकता, लेकिन सर्वाइकल कैंसर को पहले ही एक इंजैक्शन के लगवाने से रोका जा सकता है। इसके लिए पंजाब सरकार ने एक योजना शुरू की है जिसके तहत 9 से 12 साल की लड़कियों को एक इंजैक्शन लगाया जाएगा, जिससे भविष्य में वे सर्वाइकल कैंसर से बच पाएंगी। योजना के पहले चरण में ये इंजैक्शन भटिंडा और मानसा में शुरू किया गया है। इसके बाद इसे पूरे पंजाब में शुरू किया जाएगा। पंजाब इस तरह की योजना शुरू करने वाला देश का पहला राज्य है। 

 

भारत में पंजाब से होगी शुरूआत :
ज्यादातर कैंसर को होने से पहले नहीं रोका जा सकता है, लेकिन महिलाओं में होने वाला सर्वाइकल कैंसर एक ऐसा कैंसर है जिसको होने से पहले ही बचाव संभव है। इसके लिए चार तरह के वायरस जिम्मेदार है, लेकिन एच.पी.वी. नाम का इंजैक्शन लगवाने से महिला को पूरी उम्र ये कैंसर नहीं होगा। ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम बच्चों को पोलियो की दवा पिलाते हैं। चैतन्य अस्पताल के डा. नीरज कुमार ने बताया कि दुनिया के 69 देशों में यह प्रोग्राम चलाया जा रहा है, जिसके तहत ये इंजैक्शन हर लड़की को लगाया जा रहा है, वहीं अब भारत में इस प्रोग्राम की शुरूआत पंजाब से की जा रही है। लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत हैं, क्योंकि देश में हर साल 1 लाख 32 हजार महिलाएं इस कैंसर की चपेट में आ रही हैं और जिनमें से 67 हजार 5 सौ महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ये इंजैक्शन सरकारी योजना के अलावा भी किसी भी अस्पताल में जाकर लगवाया जा सकता है। इसकी कीमत करीब 3 हजार रुपए है।

 

हर साल करवाएं पैपस्मियर सैटोलॉजी टैस्ट :
डाक्टर्स की मानें तो ह्यूमन पैपीलोमा नामक वायरस इस कैंसर के होने का मुख्य कारण है जोकि असुरक्षित यौन संबंधों से होता है। गर्भाश्य में मौजूद यह वायरस कुछ समय बाद कैंसर बन जाता है। इस कैंसर से बचने के लिए स्क्रीनिंग और वैक्सीनेशन ही एकमात्र उपाय है। इसलिए हर महिला को 3 साल बाद पेपस्मियर सैटोलॉजी का टैस्ट जरूर करवाना चाहिए, ताकि जल्द इस कैंसर का पता लगाया जा सके। जब एक बार कोई भी महिला स्क्रीन पॉजीटिव हो जाती है तो फिर उसे कॉलकोस्कॉपी से डायग्रोस किया जाता है जिसके बाद उसका इलाज किया जाता है। बच्चे पैदा करने की उम्र में खासकर 30 से 40 साल के बीच इस बीमारी के होने के चांस काफी बढ़ जाते हैं। इसलिए अगर किशोरावस्था में महिलाओं को वैक्सीनेशन दे दी जाए तो बीमारी को रोका जा सकता है।  


 


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