घरों में क्राइम रोकने लिए लोगों के खर्च पर लगवाए थे कैमरे, अब फांक रहे धूल

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Thursday, November 17, 2016-7:49 AM

चंडीगढ़(कुलदीप) : यू.टी. पुलिस के निगेहबान मुहिम के तहत सुरक्षा के नाम पर पब्लिक से उन्हीं के खर्च पर उन्हीं के घरो में 12500 सी.सी.टी.वी. कैमरे लगवाए थे जोकि अब खिलौना बन कर रह गए हैं। मुहिम शुरू हुए तीन महीने पूरे हो गए हैं लेकिन इसका कोई फायदा नहीं दिखा जिसके बाद आम लोग इन कैमरों को सिरदर्दी कहने लगे हैं। लोगों का कहना है कि पता नहीं होता कि कब पुलिस वाले उनके घर डी.वी.आर. का फुटेज चैक करने पहुंच जाए, हर दिन कैमरों की देखभाल की चिंता भी रहती थी । 

 

सी.सी.टी.वी. कैमरों से परेशान लोगों के लिए सुखद अहसास है कि अब पुलिस वाले उनके घर सी.सी.टी.वी. कैमरों की रिकार्डिंग चैक करने नहीं आ रहे।  सी.सी.टी.वी. कैमरे लगवाने के बाद सितम्बर के 24 दिनों में 19 चोरियां, 19 स्नैचिंग, 6 लूट की वारदात सहित 3 किडनैपिंग की कॉल चली थी। इसके बाद से क्राइम की वारदात जारी रही । 

 

कहां-कितने कैमरे लगवाए :
आई.जी. तेजिंद्र सिंह लूथरा के आदेश पर सर्वे करके यू.टी. पुलिस की स्पैशल टीम के सर्वे में अलग-अलग स्थानों पर तकरीबन 10000 से ज्यादा सी.सी.टी.वी. कैमरे लगवाने का प्लान पास हुआ। इसके बाद पुलिस के डायरैक्शन पर लगभग सभी लोगों ने मिलकर 12000 कैमरे अपने एरिया में लगवाएं। वहीं, रिकार्ड के अनुसार सबसे ज्यादा सी.सी.टी.वी. कैमरे सैक्टर-39 थाने के इलाके में लगाए गए थे, दूसरा नंबर मनीमाजरा थाना क्षेत्र का तघा जबकि  क्राइम एरिया साऊथ डिवीजन में कुल 5000 हजार सी.सी.टी.वी. कैमरे पब्लिक से लगवाएं गए थे इसमें सैक्टर-31,34,36,39 और सैक्टर-49 थाना एरिया शामिल हैं। वहीं, ईस्ट डिवीजन में कुल 4400 सी.सी.टी.वी. कैमरे और सैंट्रल डिवीजन में अभी तक 2000 हजार 430 कैमरे लगाए हैं। पुलिस ने  अब तक इन कैमरों की मदद से यू.टी. पुलिस ने स्नैचिंग व चोरी के अलग-अलग केस में 2 को काबू करने का दावा किया है। 

 

कैमरों की क्वालिटी बेहद नॉर्मल :
जानकारों के अनुसार पुलिस ने पब्लिक से जल्दी-जल्दी में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगवा दिए। लेकिन इन कैमरों की क्वालिटी पुलिस के पुराने कैमरों की तरह ही है जिनमें धुंधली तस्वीरें आती हैं और रात में अंधेरा ही रिकार्ड होता है ।  

 

बेकार हो गए जनता के 5 करोड़ :
पब्लिक की परेशानी के बार संबंधित थाना पुलिस ने किसी के घर में जाकर बार-बार डी.बी.आर. की चैकिंग बंद करने का फैसला ले लिया है, यानी 12500 कैमरे अब खिलौने बन कर रह जाएंगे और लोगों द्वारा सुरक्षा के नाम पर लगवाए गए करीब 5 करोड़ रुपए व्यर्थ साबित होंगे।  

 

शुरू में चैकिंग पर शिकायत :
पंजाब केसरी के रिएलिटी चैक में सामने आया कि कैमरे लगने के बाद 2 सप्ताह में एक बार चैकिंग स्टॉर्ट हुई थी लेकिन 1-2 चैकिंग के बाद परिवार के लोग बार-बार पुलिस का चैकिंग के घर में आने का विरोध करने लगे थे जिनका कहना है कि घरों में कैमरे लगवाने वालों ने आरोप लगाया कि घर के अंदर लगे डी.बी.आर. की चैकिंग हर महीने करवाना पॉसिबल नहीं है। 


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