अमरीका-भारत के गठजोड़ से बौखलाया चीन

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Thursday, November 09, 2017-7:27 PM

नई दिल्ली( रंजीत कुमार ): अमरीका, जापान, आस्ट्रेलिया और भारत के बीच प्रस्तावित चार देश के गुट की स्थापना की नींव मनीला में रखी जा सकती है। चारों देशों के अधिकारी इस गुट की संरचना और उद्देश्यों के बारे में चर्चा के लिये मनीला में पहली बार बैठक करने पर विचार कर रहे हैं। यहां राजनयिक सूत्रों ने चारों देशों के बीच अधिकारी स्तर की पहली बैठक की तैयारी की पुष्टि की। उल्लेखनीय है कि इस प्रस्तावित चर्तुपक्षीय गुट को लेकर चीन नाक-भौं सिंकोडऩे लगा है। 

चीन ने लगाए कई गंभीर आरोप
चीन ने कहा कि यह गुट चीन की घेराबंदी के इरादे से है लेकिन भारत सहित चारों देशों ने कहा कि यह चर्तुपक्षीय बैठक विश्व मामलों पर आपसी सलाह-मशविरा के इरादे से है और किसी खास देश के खिलाफ निर्देशित नहीं है। भारत ने इस चर्तुपक्षीय बैठक को महत्व नहीं देते हुए कहा कि भारत इस तरह की कई अन्य बहुपक्षीय बैठकों में भाग लेता रहा है और यदि भारत के हित पूरे होते हों तो भारत प्रस्तावित चर्तुपक्षीय बैठक में भी भाग ले सकता है।

2008 में भी रखा गया था इस बैठक का प्रस्ताव 
इस चर्तुपक्षीय बैठक का पहला प्रस्ताव 2008 में रखा गया था जब एक साल पहले भारत, अमरीका, जापान और आस्ट्रेलिया और सिंगापुर ने बंगाल की खाड़ी में मालाबार साझा नौसैनिक अभ्यास किया था। लेकिन तब आस्ट्रेलिया ने इस बैठक से हाथ खींच लिये थे क्योंकि चीन ने इस बहुपक्षीय साझा अभ्यास को लेकर एतराज करते हुए सभी  देशों को विरोध में राजनयिक नोट भेजा था। लेकिन एक दशक बाद इस चर्तुपक्षीय बैठक का विचार फिर तब जीवित हुआ जब पिछले महीने जापान के विदेश मंत्री तारा कोनो ने चारों देशों के बीच बहुपक्षीय बैठक का प्रस्ताव रखा। इसके तुरंत बाद अमरीका ने इसे समर्थन प्रदान कर दिया और कहा कि चारों देशों को विश्व मामलों पर विचार करने के लिये मेल-जोल करना चाहिये। 

चीन ने दिखाए आक्रामक तेवर
 यहां राजनयिक सूत्रों का कहना है कि चीन द्वारा न केवल प्रशांत सागर बल्कि हिंद महासागर के इलाके में भी अपना आक्रामक तेवर दिखाने की वजह से विश्व की ताकतों में चिंता व्याप्त है और सभी देश चीन के इस आक्रामक तेवर पर अंकुश लगाना चाहते हैं। चीन ने पिछले कुछ सालों से दक्षिण चीन सागर के द्वीपों और सागरीय इलाके पर अपना प्रादेशिक अधिकार जताया है। चीन की यह मंशा पूरी होती है तो दक्षिण चीन सागर से होकर भारत और अन्य देशों के व्यापारिक और सैनिक पोतों की आवाजाही पर चीन नियंत्रण स्थापित कर सकता है। चारों देशों के अधिकारी चीन के इसी रवैये पर विचार कर सामूहिक कदम उठा सकते हैं इसलिये चीन इस प्रस्तावित चर्तुपक्षीय बैठक को लेकर चिंतित है।
 

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