9 गोलियां खाकर भी आतंकियों पर भारी रहे चीता का नाम अशोक चक्र के लिए भेजा

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Tuesday, July 18, 2017-2:00 PM

नई दिल्ली: आतंकियों आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में 9 गोलियां लगने के बावजूद भी मौत को मात देने वाले सीआरपीएफ के कमांडिंग ऑफिसर चेतन कुमार चीता का नाम सीआरपीएफ ने सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र के लिए भेजा है। चीता के अलावा शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार के नाम की सिफारिश भी गैलेंटरी अवॉर्ड के लिए किया गया है।
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कौन हैं चेतन चीता
14 फरवरी को बांदीपुरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में चीता घायल हो गए थे। इस मुठभेड़ में 3 जवान शहीद हो गए थे। इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खबर के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च अभियान चलाया था, लेकिन इसकी जानकारी आतंकियों को पहले ही मिल गई। चेतन ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे।मुठभेड़ के दौरान आतंकियों ने उनपर 30 गोलियां दागीं, जिनमें 9 गोलियां उन्हें लगीं। घायल हालत में चीता को पहले श्रीनगर के आर्मी अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनकी ब्लीडिंग रोकने के लिए दवाइयां दी गईं। हालांकि जख्म की गंभीरता को देखते हुए उन्हें एयर एबुलेंस के जरिए एम्स ले जाया गया। दो महीने के इलाज के बाद उनकी स्थिति ठीक हुई और अप्रैल में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई। अस्पताल से घर लौटने पर चीता ने इच्छा जाहिर की थी कि वे  अब भी दुश्मनों से लोहा लेने के लिए कश्मीर जाना चाहते हैं।
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किनको दिया जाता है अशोक चक्र
अशोक चक्र भारत का शांति के समय का सबसे ऊंचा वीरता का पदक है। शांति काल में वीरता के लिए प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता, शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। अशोक चक्र मरणोपरान्त भी दिया जाता है।

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