बच्चे की पीठ पर मारना यौन शोषण नहीं है: अदालत

Edited By Punjab Kesari,Updated: 14 Aug, 2017 06:25 PM

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दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि किसी बच्चे की पीठ पर मारना पॉक्सो कानून के तहत यौन शोषण के दायरे में नहीं आता क्योंकि कृत्य के पीछे किसी यौन क्रिया की मंशा होनी चाहिए।

 नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि किसी बच्चे की पीठ पर मारना पॉक्सो कानून के तहत यौन शोषण के दायरे में नहीं आता क्योंकि कृत्य के पीछे किसी यौन क्रिया की मंशा होनी चाहिए।  अदालत ने कहा कि बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत अपराध तब तय किया जाता है जब शोषण किसी यौन क्रिया की मंशा से किया जाए।  अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए के सरपाल ने कहा, ‘‘जैसा कि पॉक्सो अधिनियम के तहत परिभाषित है, केवल पीड़ित की पीठ पर मारना यौन शोषण के दायरे में नहीं आता, अधिनियम के मुताबिक यौन शोषण किसी यौन क्रिया की मंशा से हुआ होना चाहिए। पॉक्सो अधिनियम के तहत तब ही अपराध दंडनीय होगा।’’ 

अदालत ने यह टिप्पणी 10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा द्वारा एक व्यक्ति पर यौन शोषण का आरोप लगाने के मामले की सुनवाई के दौरान की। लड़की ने इस व्यक्ति पर उसके ऊपर थूकने और उसकी पीठ पर हाथ से मारने का आरोप लगाया है।   न्यायाधीश ने कहा कि आरोपपत्र पर ध्यान देने के बाद उनका यह मानना है कि पॉक्सो अधिनियम के तहत इस घटना में यौन शोषण का मामला नहीं बनता। इसके साथ ही पोस्को अदालत ने मामले को फिर से मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के पास यह निर्णय करने के लिये भेज दिया कि इस व्यक्ति के खिलाफ क्या कोई और मामला बनता है।  

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