डायबिटीज के मरीज खुद है अपनी बीमारी से अनजान

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Sunday, November 13, 2016-1:53 PM

चंडीगढ़ (रवि) : भारत में 50 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों को यह पता नहीं होता कि वह इस बीमारी से पीड़ित हैं। साथ ही उन्हें इससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का भी ज्ञान नहीं होता। यह कहना है पी.जी.आई, कंसल्टैंट  इंडोक्राइनोलोजिस्ट डाक्टर रमा वालिया का। डाक्टर रमा की माने तो एक रिसर्च में सामने आया है कि डायबिटीज के इलाज में  सुधार के बावजूद अनडाइग्नोस्ड मरीजों का प्रतिशत 50 के आंकड़े को स्पर्श कर चुका है। डायबिटीज को सामान्य रूप से ब्लड में शूगर बढऩे की बीमारी के तौर पर जाना जाता है लेकिन लंबे वक्त तक बल्ड में शूगर का बढऩा शरीर के विभिन्न अंगों पर कितना बुरा प्रभाव डालता है इसका बहुत से लोगों को नहीं पता। डाक्टर रमा की मानें तो भारतीय कम उम्र में टाइप 2 डायबिटीज से ज्यादा पीड़ित हैं। 

 

वर्ष 2014 में प्रकाशित सिंडी ट्रायल  में सामने आया था कि भारत में 46 प्रतिशत लोग टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित रोगी 40 वर्ष से कम उम्र पाए गए। युवा रोगियों  के इस समूह में जांच की गई और पता चला कि इन रोगियों में हृदय रोग के विकसित होने का जोखिम ज्यादा था। डाक्टर रमा ने बताया कि इसके नतीजों को हाल ही में इंडियन जर्नल ऑफ इंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबोलिज्म में भी प्रकाशित किया गया। इसके नतीजे यह दर्शाते हैं कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित युवा रोगियों में हृदय रोग के होने का जोखिम ज्यादा होता है। साथ ही उन्होंने बताया कि टाइप 2 डायबिटीज के 70 प्रतिशत मामलों को स्वस्थ जीवनशैली को अपना कर रोका अथवा टाला जा सकता है।

 

नियमित जांच जरुरी
डायबिटीज को ज्यादातर लोग गंभीर नहीं लेते लेकिन यह ऐसा रोग है जो आपके शरीर के दूसरे अंगों पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। अनियंत्रित ब्लड शूगर का लेव हृदय रोग, अंधापन, किडनी की खराबी जैसे अनेक गंभीर रोगों के कारण बनता है। डाक्टर रमा ने बताया कि कई केसों में मरीज अपने पैरों को भी गवां देते हैं। इसलिए डायबिटीज मरीज को नियमित जांच जरूरी करवानी चाहिए ताकि इसे कंट्रोल किया जा सके। साथ ही शरीर के अंगों विशेष कर आंखों, किडनी एवं पैरों की नियमित जांच आवश्यक है।


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