अब ड्राइविंग टेस्ट में कार नहीं, सड़क चलेगी

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Monday, November 21, 2016-6:32 PM

नई दिल्लीः अगली बार जब आप ड्राइविंग टेस्ट देने जाएं तो हो सकता है कि आपके सामने स्क्रीन पर सड़क चल रही हो और आप स्थिर कार में बैठकर टेस्ट दे रहे हों। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कार सिम्युलेटर बनाया है जिसमें चालक को लगेगा कि वह सड़क पर कार चला रहा है, लेकिन वास्तव में कार स्थिर होगी। इस सिम्युलेटर का इस्तेमाल ड्राइविंग ट्रेनिंग के लिए भी किया जा सकता है। परियोजना पर काम करने वाली संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. कामिनी गुप्ता ने बताया कि परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है तथा अगले साल फरवरी तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण होने की उम्मीद है। 

ड्राइविंग टेस्ट के लिए सिम्युलेटर
उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर सड़क सुरक्षा पर बनाई गई समिति ने भी नई दिल्ली स्थित सीआरआरआई का दौरा किया था। उसका कहना है कि ड्राइविंग टेस्ट के लिए सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) पर यह सिम्युलेटर लगाया जाना चाहिए। यह सिम्युलेटर तैयार करने में सीआरआरआई ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) की अन्य प्रयोगशालाओं नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरी तथा सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट ऑर्गेनाइजेशन का भी सहयोग लिया है। परियोजना पर काम वर्ष 2012 में शुरू किया गया था। 

ड्राइविंग टेस्ट के साथ साइकोमोटर टेस्ट
डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस सिम्युलेटर से ड्राइविंग टेस्ट के साथ ही साइकोमोटर टेस्ट भी किया जा सकेगा जिसके लिए टेस्ट के दौरान ही चालक का प्रतिक्रिया समय, गति और दूरी को पहचानने की उसकी क्षमता, दबाव झेलने की क्षमता, सिग्नलों तथा नियमों के बारे में जानकारी तथा कलर ब्लाइंडनेस के आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। आम तौर पर आरटीओ में जगह सीमित होती है तथा इसमें टेस्टिंग लेन की परिस्थितियां वास्तविक सड़क की परिस्थितियों से अलग होती हैं। लेकिन, सिम्यूलेटर पर पांच तरह की सड़कों के विकल्प होंगे। 

रियल गाड़ी चलाने का अहसास
टेस्ट लेने वाला या सिखाने वाला इंस्ट्रक्टर एक्सप्रेस वे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राजकीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों के साथ आरटीओ ट्रायल में से कोई एक विकल्प चुन सकता है। यह सिम्यूलेटर एक कार तथा उसके सामने लगे बड़े स्क्रीन से पूरा होता है। कार के गियर, क्लच, ब्रेक, एक्स्लेरेटर तथा सभी लाइटें एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्क्रीन से जुड़ी होती है। एक्स्लेरेटर ज्यादा देने पर स्क्रीन पर चल रही सड़क पर चालक की गति बढ़ जाती है जबकि ब्रेक लगाने पर उसे उसी प्रकार कार के धीमी होने तथा रुकने का एहसास होता है जैसा वास्तविक सड़क पर होता है।


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