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श्रीनगर-काजीगुन्ड राजमार्ग की फोर-लेन परियोजना की एक ओर ‘डेडलाइन मिस’

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Thursday, February 15, 2018-7:14 PM

श्रीनगर : श्रीनगर-काजीगुन्ड राजमार्ग के एक हिस्से की चार-लाइनिंग करने के लिए सात साल पहले शुरु परियोजना अभी तक पूरी नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न जक्शनों पर अधूरे ओवरहेड पुलों के कारण परियोजना पूरी करने के लिए एक ओर ‘डेडलाइन’ मिस हो गई है। इस परियोजना को पूरा करने के लिए दिसंबर की डेडलाइन स्थापित की गई थी। 


हालांकि, पिछले साल के आरंभ में पब्लिक वर्कस मंत्री नईम अख्तर ने कहा था कि श्रीनगर-काजीगुन्ड राजमार्ग के हिस्से की चार-लाइनिंग का काम दिसंबर तक पूरा किया जाएगा। अतीत में तीन डेडलाइनों को मिस करने के बावजूद श्रीनगर-काजीगुन्ड राष्ट्रीय राजमार्ग को अभी तक पूरा नहीं किया गया है। राजमार्ग के चार लाइनिंग कार्य को पूरा करने के लिए पहली डेडलाइन जून 2014 में स्थापित किया गया और बाद में 2015 तक विस्तार किया गया और उसके बाद दिसंबर 2017 तक विस्तार किया गया। लेकिन फिर भी परियोजना को पूरा करने के लिए संबंधित प्राधिकरण विफल रहा है। 


दो महीने से ज्यादा लगेगा समय
अधिकारियों का कहना था कि श्रीनगर-काजीगुन्ड राजमार्ग को पूरी तरह से चार-लाइनिंग करने के लिए दो महीनों से ज्यादा समय लगेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण के अधिकारियों ने कहा कि अधूरे ओवरहेड पुलों और कुछ स्थानों पर भूमि अधिग्रहण के मुद्दा इसका कारण है। प्राधिकरण के एक अधिकारी जो परियोजना का हिस्सा है, ने कहा कि अवंतिपूरा और काजीगुन्ड में ओवरहेड पुलों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं किया गया है। इन निर्माणों को पूरा करने में दो से तीन महीनें लग जाएंगे। हमनें कुछ स्थानों जैसे पांपोर बाइपास, खन्नाबल और बिजबिहाडा को खोल दिया हैं। साथ ही गालंदर से लसजन बाइपास तक नो किलोमीटर के प्रथम अनुभव को पिछले साल अक्तूबर में खोल दिया गया। 


 भूमि अधिग्रहण मुद्दा बन रहा कारण
अधिकारियों के अनुसार भूमि अधिग्रहण का मुद्दा परियोजना को बाधित कर रहा हैं। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों को मुआवजे के तौर पर 86 करोड़ रुपए की जरुरत है। भूमि अधिग्रहण के लिए कुल राशि की जरुरत 391.77 करोड़ थी जिसमें से राजमार्ग प्राधिकरण ने 305.62 करोड़ जारी किया है। लाभार्थियों के बीच अभी तक 297.50 करोड़ का भुगतान किया गया। साथ ही 8.02 करोड़ ही सरकार के पास बचे हंै। इसके अलावा ख्रिव और लस्सीपुरा इलाकों में भूमि अधिग्रहण के मामले लंबित थे। 

2011 में शुरू हुई थी परियोजना
बता दें कि परियोजना का काम 2011 में शुरु किया गया था और प्रारंभ में परियोजना को जून 2014 में पूरा करने की डेडलाइन स्थापित की गई थी। हालांकि, 2014 बाढ़ और 2016 की अशांति से भी परियोजना पर भारी असर पड़ा। आलम यह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पी.एम.ओ.) द्वारा परियोजना की गति पर नजर रखे जाने और जम्मू कश्मीर उच्च न्यायलय द्वारा परियोजना को पूरा करने के लिए 31 जुलाई 2016 की डेडलाइन स्थापित करने के बावजूद परियोजना में देरी हो रही हैं।  

हैदराबाद की कंपनी पूरा कर रह काम
इस परियोजना को पूरा करने का काम हैदराबाद आधारित कंपनी आर.ए.एम.के.वाई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (आर.आई.एल.) को दिया गया था। हालांकि, स्थापित डेडलाइन को मिस किए जाने पर इसने परियजोना को पूरा करने के लिए 12 महीनों के विस्तार की मांग करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से संपर्क किया और इसको इजाजत दी गई। उल्लेखनीय हैं कि हाल ही में मुख्य सचिव बी.बी. व्यास ने श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर बनिहाल-रामबन खंड के उन्नयन पर काम की धीमी गति पर निराशा व्यक्त की थी। उन्होंने निष्पादन एजेंसी से उचित स्तरों पर निपटान के लिए कम में बाधा डालने वाले मुद्दों का तत्काल पता लगाने के लिए कहा था।
 

इस तरह से बांटा गया था प्रोजेक्ट
जाहिर हैं कि श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर चार लाइनिंग परियोजना को छह उप परियोजनाओं में बांटा गया था जिसमें श्रीनगर-काजीगुन्ड (67.7 किलोमीटर), काजीगुन्ड-बनिहाल मार्ग (15.25 किलोमीटर), बनिहाल-रामबन मार्ग (36 किलोमीटर), रामबन-उधमपुर मार्ग (43 किलोमीटर), चेनानी-नाड़ी (9.1 तिसोमीटर) और जम्मू-उधमपुर (65 किलोमीटर) शामिल हैं। 

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