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50 फीसदी पाटीदार तो भाजपा के साथ ही रहेंगे: वाघेला

  • 50 फीसदी पाटीदार तो भाजपा के साथ ही रहेंगे: वाघेला
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Tuesday, November 28, 2017-3:26 PM

अहमदाबाद: गुजरात के पूर्व सीएम तथा जन विकल्प मोर्चा की अगुवाई कर रहे दिग्गज नेता शंकरसिंह वाघेला ने आज कहा कि गुजरात में भाजपा से नाराज पाटीदारों का कांग्रेस के दरवाजे पर सही तरीके से स्वागत नहीं हो पाने के कारण इनमें से कम से कम 50 फीसदी फिर से चुनाव में सत्तारूढ दल का ही साथ देंगे।  वाघेेला ने भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के खुद अपनी पार्टी की हार की सुपारी लेने का आरोप भी लगाया। और कहा कि राहुल गांधी को वह पूरी तरह से एक ‘भद्र राजनेता’ मानते हैं जो जल्द ही पार्टी के अध्यक्ष बनेंगे जिसके लिए वह उन्हें अग्रिम शुभकामना भी देते हैं।  यहां एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भाजपा 2002 से लगातार हिन्दू-मुस्लिम के सांपद्रायिक ध्रुवीकरण के चलते चुनाव जीत रही हैं विकास के चलते नहीं। कांग्रेस और भाजपा दोनो चुनाव में असली मुद्दे नहीं उठा कर मार्केटिंग और पैसे से खरीदे नारों का सहारा ले रहे हैं। 

उन्होने जाति आधारित संगठन चलाने वाले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दलित कार्यकर्ता जिग्नेश मेवाणी तथा कांग्रेस में शामिल हुए ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर का चुनाव पर कोई असर नहीं पडऩे का भी दावा किया और कहा कि कांग्रेस के साथ खुल कर चले जाने से उनका कोई अलग वजूद नहीं रह गया। व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते इनका कोई असर नहीं है। हार्दिक 50 प्रतिशत की सीमा से बाहर जाकर आरक्षण दिलाने की बात कर एक तरह से पाटीदारों को लॉलीपॉप ही दिखा रहे हैं। भाजपा के दो बड़े समर्थक व्यापारी वर्ग और पाटीदार रहे हैं। जीएसटी के चलते व्यापारी भी खासे नाराज थे। दोनो वर्ग कांग्रेस के दरवाजे तक गए थे पर उनका वैसा स्वागत नहीं हुआ जैसा होना चाहिए था। इसलिए अब कम से कम 50 फीसदी पाटीदार तो फिर से भाजपा के साथ ही रहेंगे।  

वाघेला ने इस बात से इंकार किया कि उनका हर दांव उलटा पड़ गया है। उन्होंने कहा कि उनके विधायक बेटे महेन्द्र सिंह के चुनाव नहीं लडऩे से कोई नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने चुनाव के दौरान टिकटों को लेकर अपनी ही पार्टी के विरोध तथा भाजपा और कांग्रेस कार्यालयों पर पुलिस तक बुलाने की नौबत को लोकतंत्र के लिए खतरनाक प्रवृत्ति बताया। उन्होंने जन विकल्प मोर्चा को उनका एक प्रयोग बताया जिसके जरिये उमीदवार के चयन में आम लोगों की भागीदारी की पहल हो सके।  

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