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हज सब्सिडी: क्या करेंगे ममता, केजरीवाल और विजयन?

  • हज सब्सिडी: क्या करेंगे ममता, केजरीवाल और विजयन?
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Wednesday, January 17, 2018-6:01 PM

नेशनल डेस्क (वसुधा शर्मा): केंद्र सरकार ने इस साल से हज यात्रा पर मुसलमानों को दी जाने वाली सब्सिडी खत्म करके गेम उन राज्यों के पाले में डाल दी है जहां मुस्लिम आबादी राजनीति को प्रभावित करने की स्थिति मे है। 2011 के जनगणना आंकड़ों के मुताबिक ऐसे 7 राज्य हैं जहां मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है। अब ऐसे राज्यों पर हज यात्रा की सब्सिडी राज्य की तरफ से शुरु करने का दबाव पड़ेगा क्योंकि देश के कई राज्य हिंदुओं की चारधाम और कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा के लिए राज्य के कोटे से सब्सिडी दे रहे हैंं। हांलाकि केंद्र की तरफ से इन दोनों यात्रा के लिए सब्सिडी नहीं मिलती।
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ममता बनर्जी खेल सकती हैं दांव
तीन तलाक़ का विरोध करने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हज सब्सिडी को लेकर फिर राजनीति करने का मौका मिल जाएगा। हालांकि राज्य में चुनाव होने वाले हैं ऐसे में ममता सरकार के पास ज्यादा करने के लिए कुछ नहीं होगा। बंगाल की सत्ता में काबिज रहने के लिए ममता जानती हैं कि 30 फीसदी मुस्लिम वोटरों के समर्थन के बिना उसके सपने पूरे नहीं हो सकते। ऐसे में ममता सरकार मुस्लिम समुदाय ​को राज्य कोटे से सब्सिडी देकर एक बड़ा दांव खेल सकती है। इससे पहले भी टीएमसी ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनके आधार पर भाजपा उन पर एक खास समुदाय के तुष्टिकरण करने का आरोप लगाती रही है। 
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हज यात्रा जाने में केरल सबसे आगे
केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सरकार आई है, तब से संघ और भाजपा को निशाना बनाती रहा है। तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा केरल के लोगों का दिल जीतने में नाकाम रही पाई है। ऐसे में भाजपा का हज यात्रा को लेकर लिया गया यह बड़ा फैसला केरल में पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर स​कता है। केरल की कुल साढ़े तीन करोड़ आबादी में 25 प्रतिशत से अधिक मुसलमान आबादी है जिसे खुश करने के लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन मुस्लिमों को सब्सिडी का तोहफा दे सकते  हैं। बिना मेहरम हज यात्रा के लिए भी सबसे अधिक आवेदन केरल से ही आए हैं। 
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जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी 
जम्मू-कश्मीर भारत के उत्तरी भाग का एक राज्य जहां करीब दो-तिहाई आबादी मुस्लिम हैं। देश के किसी भी राज्य के मुकाबले जम्मू और कश्मीर में मुस्लिम आबादी का अनुपात सबसे अधिक है। यहां  साक्षरता दर 68.74 प्रतिशत है ऐसे में भाजपा की सहयोगी पार्टी पीडीपी बड़ी आबादी को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती। माना जा रहा है कि पीडीपी-भाजपा से विचार-विमर्श कर मुस्लिम समुदाय को सब्सिडी देने का फैसला ले सकती है। 
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यूपी के मुस्लिम समुदाय पर पड़ेगा सबसे अधिक असर
देश के सर्वाधिक आबादी वाले प्रांत उत्तर प्रदेश में 3.84 करोड़ मुसलमान हैं जो राज्य की आबादी का 19 फीसदी है। हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की सबसे अधिक संख्या यूपी के मुसलमानों की ही है ऐसे में केंद्र सरकार के इस फैसला का सबसे ज्यादा असर यूपी के मुस्लिम समुदाय पर ही पड़ेगा। इस फैसले को बदलने को लेकर आवाज भी उठाई जाएगी लेकिन पश्चिम बंगाल और केरल की तरह यहां इसे बदलना आसान नहीं होगा। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इससे पहले भी कई ऐसे फैसले ले चुके हैं जिसका मुस्लिम समुदाय ने ऐतराज जताया। हांलांकि कड़े विरोध के बावजूद भी इन फैसलों को बदला नहीं गया।
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दिल्ली में 12 प्रतिशत मुस्लिम अबादी
केजरीवाल सरकार हज सब्सिडी पर मोदी सरकार के फैसले को भुनाने का मौका नहीं छोड़ेगी। दिल्ली में लगभग 12 प्रतिशत मुस्लिम अबादी है। ऐसे में केजरीवाल सरकार हज यात्रा के लिए राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी का ऐलान करने पर विचार कर सकती है। 
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नीतीश सरकार की बढ़ी मुश्किलें 
बिहार में मुसलमान आबादी पूरे राज्य में बिखरी हुई है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार बिहार में मुसलमान आबादी क़रीब 17 फ़ीसदी है। राज्य की 243 विधानसभा क्षेत्रों में से क़रीब 50 विधानसभा सीटों पर मुसलमानों के वोट निर्णायक माने जाते हैं। ऐसे में इस खास तबके पर सबकी निगाह टिकी रहती है। ​राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुस्लिम समुदाओं को खुश करने को मौका नहीं छोड़ते लेकिन अबकी बार उनके लिए यह राह आसान नहीं ​है। नीतीश अपनी सहयोगी भाजपा सरकार के खिलाफ जाकर कोई बड़ा कदम नहीं उठा सकते। अगर वह ऐसा करते हैं तो यह उनके लिए कई मुश्किलें पैदा कर सकता है। 
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असम में भाजपा कर रही विरोध का सामना
असम में चुनावी नतीजों पर असर डालने में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका हमेशा ही अहम रही है। पूर्वोत्तर के सबसे बड़े सूबे असम में मुस्लिम आबादी 34 फीसदी है। हालांकि पिछले एक दशक में स्थिति बदली है। असम में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप है कि बंगालियों और गैर हिंदुओं को असम से भगाने की साजिश रची जा रही है। ऐसे में देखना यह होगा कि असम में पहले से ही विरोध का सामना कर रही भाजपा सब्सिडी के इस फैसले को राज्य में लागू कर पाएगी या नहीं।

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