सुरक्षित नहीं हैं अस्पताल के आई.सी.यू., तेजी से फैल रही यह खतरनाक बीमारी, आप भी पढ़िए

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Thursday, November 24, 2016-9:07 AM

चंडीगढ़ (रवि) : मैडीकल क्षेत्र में नई-नई टैक्नोलॉजी और तरक्की होने के बावजूद कई नई बीमारियां डाक्टरों के सामने रोजाना एक चुनौती बनकर आ रही हैं। इसी कड़ी में एक नई बीमारी इन दिनों डाक्टरों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कैंडिडा नामक यह बीमारी अस्पतालों में पैदा हीने वाले फंगल की देन है, जिसकी शुरूआत दिल्ली के गंगाराम अस्पताल से चार वर्ष पहले हुई थी, जिसने अब पूरे उतरी भारत के अस्पतालों में जड़े जमा ली हैं, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है।  पी.जी.आई. जैसा आग्रणी चिकित्सा संस्थान भी इस खतरनाक बीमारी से अछूता नहीं है यह कहना है पी.जी.आई. माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के प्रमुख  प्रोफैसर अरुण आलोक चक्रवती का, उन्होंने बताया कि एक नया फंगस कैंडिडा ओरिस जो तेजी से भारत में फैल रहा है, जिसका मुख्य कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इस बीमारी का पहला मरीज कुछ वक्त पहले दिल्ली में कंफर्म किया गया था, लेकिन यह बीमारी अब देश के कई अस्पतालों तक पहुंच चुकी है। 

 

देश के 27 आई.सी.यू. में से 19 में मिला इन्फैक्शन 
प्रोफैसर अरुण आलोक चक्रवती ने बताया कि दिल्ली के गंगाराम अस्पताल से चार पहले इस बीमारी का फंगस मिला था, जिसके बाद पूरे उत्तर भारत समेत पी.जी.आई. में भी इस फंगस की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कैंडिडा ओरिस का पता लगाने के लिए पी.जी.आई. ने देश के कई मैडीकल संस्थानों के साथ मिलकर 27 अस्पतालों के आई.सी.यू. पर रिचर्स किया है, जिसमें से 19 अस्पतालों के आई.सी.यू. में कैंडिडा ओरिस फंगस पाया गया है। 

 

रिसर्च में सबसे हैरानी वाली बात यह सामने आई है कि यह सभी आई.सी.यू. देश के बड़े मैडीकल संस्थानों के हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि अस्पताल के सबसे सुरक्षित एरिया में से एक माने जाने वाले आई.सी.यू. में भी मरीज को फंगल इंफैक्शन हो सकता है। इसकी वजह से पहले से ही गंभीर मरीज का इलाज और मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में मरीज की मौत के बाद अटोप्सी टेस्ट के दौरान फंगल इंफैक्शन या दूसरे वायरस का पता चलता है। 

 

80 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं मौत के आसार
फंगल के कारण पैदा हुए कैंडिडा ओरिस के चलते आई.सी.यू. में भर्ती मरीज की मौत के आसार 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं। रिसर्च में शामिल किए गए आई.सी.यू. में से अभी तक 150 मरीजों की पुष्टि की जा चुकी है। डाक्टर चक्रवती ने बताया कि फिलहाल इसके इतने मरीज सामने आए हैं, लेकिन इसके मरीज ज्यादा होने के आसार लगाए जा रहे हैं। वहीं अगर इसके लक्षणों की बात करें तो बुखार के साथ, थकावट और यूरिन कम आना इसके लक्षणों में से कुछ है। 

 

डाक्टर चक्रवती ने बताया कि अभी तक इसकी कोई वैक्सीन नहीं बनी है लेकिन इकाईनो कैंडिन नामक एंटी बॉयोटिक इसमें काम कर रहा है। पी.जी.आई. में भी कई लोगों को इस फंगस से ग्रस्त देखा गया है। उन्होंने कहा कि इसकी रोकथाम के लिए जरुरी है अपने आसपास सफाई रखना। डाक्टर चक्रवती ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग और नेचर से छेड़छाड़ के कारण ही पुरानी बीमारयिां जैसे टी.बी. डेंगू, चिकनगुनिया, वापस आ रही हैं। 

 

पी.जी.आई. के तीन विभागों मैडीकल माइक्रोबायोलॉजी, मैडीकल पेरासिटोलॉजी व वायरोलॉजी  द्वारा सयुंक्त रूप से 40वीं सालाना पांच दिवसीय  मैडीकल माइक्रोबायोलोजिस्ट्स कांफैंस का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी आज से शुरूआत होगी। जिसमें वायरस व  बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाली बीमारियों को लेकर उनके इलाज समेत कई पहलूओं पर चर्चा की जाएगी। इनको लेकर वर्कशाप व लैक्चर्स का आयोजन रखा जाएगा। कांफैं्रस में 1600 से ज्यादा डेलीगेट्स भाग लेंगे। कांफै्रंस में जिन महत्वपूर्ण पहलूओं पर चर्चा की जाएगी उनमें बीमारी का रेपिड डाइग्नोज, रैस्पिरेटरी इंफेक्शन और बीमारी के कारणों की अनदेखी शामिल होगी। 


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