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आसियान सम्मेलनः भारत-आस्ट्रेलिया सहित 4 देशों ने चीन को चित करने की बनाई रणनीति

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Monday, November 13, 2017-4:47 PM

मनीला: एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन की घुसपैठ रोकने व इसकी सुरक्षा को लेकर आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे भारत, आस्ट्रेलिया, अमरीका और जापान के अधिकारियों के बीच बैठक हुई जिसमें एशिया प्रशांत क्षेत्र में प्रस्तावित चार-पक्षीय गठजोड़ के तहत सुरक्षा सहयोग को आकार देने का प्रयास किया गया। बैठक  में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, खुला और समावेशी बनाने एवं साझा हितों को बढ़ावा देने से जुड़े मुद्दों के अलावा चीन को चित करने की रणनीति पर गहन चर्चा की गई। गौरतलब है कि इस रणनीतिक क्षेत्र में चीन अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है।

बैठक के बाद इसमें शामिल सभी चार देशों ने अपने बयान जारी किए, जिसमें भारत-प्रशान्त महासागरीय क्षेत्र पर चर्चा को प्रमुख रूप से शामिल किया गया और सभी देशों ने नियम आधारित आदेश को बरकरार रखने और क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए काम करने का संकल्प जताया गया।यह बैठक आसियान सम्मेलन से पहले आयोजित की गई है। मंगलवार से शुरू होने वाले आसियान सम्मेलन में भारत-प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण-चीन सागर में चीन के सैन्य विस्तार की चुनौतियों के बारे में भी चर्चा की जा सकती है। 

इस बैठक को इन चारों देशों के बीच सुरक्षा वार्ता शुरू करने की दिशा में पहले कदम के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में उभरते सुरक्षा परिदृश्य के अलावा आतंकवाद और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के उपायों पर भी चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "वे इस बात पर सहमत हुए हैं कि मुक्त, खुला, समृद्ध और समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र दुनिया के लिए दीर्घकालीन हितों को पूरा करता है। अधिकारियों ने क्षेत्र को प्रभावित करने वाले आतंकवाद और प्रसार जैसी साझा चुनौतियों के समाधान के अलावा संपर्क बढ़ाने के लिए विचारों का आदान-प्रदान किया।"

सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकॉम टर्नबुल पहले ही पहुंच चुके हैं। भारत ने 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को रेखांकित किया जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में गतिविधियों का प्रमुख आधार है। ट्रंप और आबे के साथ मोदी कल द्विपक्षीय बैठक करेंगे। बैठक में भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत, अमरीका, आस्ट्रेलिया और जापान के साथ चार पक्षीय सुरक्षा वार्ता के गठन का विचार 10 साल पहले आया था लेकिन यह अबतक धरातल पर नहीं उतर पाया।चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग पूरे हिस्से पर दावा करता है जबकि वियतनाम, फिलीपन, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान इसका विरोध कर रहे हैं।अमरीका विवादित दक्षिण और पूर्वी चीन सागर पर दावे को लेकर चीन पर अंतर्राष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है।

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