भारत की आन, बान और शान : 10 कमांडो फोर्सेज

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Sunday, November 20, 2016-12:27 PM

नेशनल डेस्क: भारत दुनिया का 7वां सबसे बड़ा देश है और अपने शैतान पड़ोसियों से चिंतित भी। ऐसे मुश्किल हालात में अपने देश की सीमाओं व देश के अंदर नागरिकों की रक्षा करना एक बहुत ही कठिन काम है लेकिन हम भारतीयों के लिए कुछ भी कठिन नहीं जब हमारी सेनाएं हमारे साथ हैं परन्तु हमें  अपनी स्पैशल फोर्सेज के बारे में ज्यादा नहीं पता। यहां हम आपको भारत की 10 सबसे घातक, शानदार और इंटैलीजैंट कमांडो फोर्सेस के बारे में बताते हैं। इनके आगे दुश्मन चुटकियों में घुटने टेक देते हैं। ये सभी बल भारत की आन, बान और शान हैं।
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NSG
एन.एस.जी. देश की सबसे अहम कमांडो फोर्स में से एक है जो गृह मंत्रालय के अंदर काम करती है। एन.एस.जी. में चुने जाने वाले जवान तीनों सेनाओं, पुलिस और पैरामिलिट्री के सबसे अच्छे जवान होते हैं। आतंकवादियों के खिलाफ आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर लडऩे के लिए इन्हें विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। 26/11 मुंबई हमलों के दौरान एन.एस.जी. की भूमिका को सभी ने सराहा था। इसके साथ ही वी.आई.पी. सुरक्षा, बम निरोधक और एंटी हाइजैकिंग के लिए इन्हें खासतौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इनमें आर्मी के लड़ाके शामिल किए जाते हैं। हालांकि दूसरी फोर्सेस से भी लोग शामिल किए जाते हैं। इनकी फुर्ती और तेजी की वजह से इन्हें ‘ब्लैक कैट’ भी कहा जाता है।

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गरुड़
गरुड़ कमांडोज भारतीय वायुसेना ने 2004 में अपने एयर बेस की सुरक्षा के लिए इस फोर्स की स्थापना की मगर गरुड़ को युद्ध के दौरान दुश्मन की सीमा के पीछे काम करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। आर्मी फोर्सेस से अलग ये कमांडो काली टोपी पहनते हैं। गरुड़ जवान पानी, हवा और रात में मार करने की अनोखी क्षमता रखते हैं और  इन्हें मुख्य तौर पर माओवादियों के खिलाफ मुहिम में शामिल किया जाता रहा है।

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सी.आई.एस.एफ.
सी.आई.एस.एफ. के कमांडोज को आमतौर पर वी.वी.आई.पी., एयरपोर्ट और इंडस्ट्रियल इलाकों के लिए खासतौर पर तैनात किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसे दिल्ली और मुंबई इन्हीं की निगरानी में सुरक्षित रहते हैं। मुंबई के 26/11 हमले के बाद इनका इस्तेमाल प्राइवेट सैक्टर की सुरक्षा के लिए भी होने लगा है। इसका अपना स्पैशल फायर विंग भी है, साथ ही यह फोर्स दिल्ली मैट्रो की सुरक्षा भी करती है।

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मार्कोस
मार्कोस का नाम आपने कम ही सुना होगा। ये भारतीय जल सेना के  स्पैशल कमांडोज हैं। मार्कोस को जल, थल और हवा में लडऩे के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। समुद्री मिशन को अंजाम देने में इन्हें महारत है। 20 साल उम्र वाले प्रति 10 हजार सैनिकों में एक का चयन मार्कोस फोर्स के लिए होता है। इसके बाद इन्हें अमेरिकी और ब्रिटिश सील्स के साथ अढ़ाई साल की कड़ी ट्रेनिंग करनी होती है। स्पैशल आप्रेशन के लिए भारतीय जल सेना के इन कमांडोज को बुलाया जाता है। मार्कोस हाथ-पैर बंधे होने पर भी तैरने में माहिर होते हैं। ये कमांडो हमेशा सार्वजनिक होने से बचते हैं। नौसेना के सीनियर अफसरों की मानें तो परिवार वालों को भी उनके कमांडो होने का पता नहीं होता। 26/11 हमले में आतंकवादियों से निपटने में इनकी खास भूमिका थी।

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स्वात
स्वात कमांडोज अमेरिका की तर्ज पर बनी है। भारत की स्वात कमांडोज की टीम किसी भी हालत से निपटने में माहिर है। दिल्ली पुलिस की स्वात कमांडो का मतलब है सुरक्षा की गारंटी। स्वात कमांडो की ट्रेनिंनग बेहद कठिन होती है। ये कमांडो फोर्स किसी भी हालत में दुश्मन का खात्मा करने के लिए ट्रेंड होते हैं। इसमें इन्हें हवा में, पानी में और जंगल में घात लगाकर मार करने की तकनीक सिखाई जाती है। आधुनिक हथियारों से लैस ये कमांडो रात के अंधेरे में  भी दुश्मन को पहचान उनका खात्मा करने के लिए ट्रेंड होते हैं। आतंकियों और नक्सलियों से निपटने के लिए तैयार किया जाता है। 2008 में मुंबई हमले के बाद दिल्ली पुलिस की स्वात कमांडोज का गठन किया गया था।

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आई.टी.बी.पी.
आई.टी.बी.पी. के स्पैशल कमांडोज ने मुंबई के 26/11 आतंकी हमले के बाद मुख्य अभियुक्त अजमल कसाब को मुंबई जेल में रखने में अहम भूमिका निभाई थी। दिल्ली के तिहाड़ जेल की निगरानी की कमान भी इन्हीं के हाथों में है। इसके साथ ही ये भारत-चीन सीमा की भी विशेष निगरानी करते हैं।
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कोबरा
कोबरा कमांडो यानी कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन। कोबरा के जवानों को गुरिल्ला ट्रेनिंग द्वारा तैयार किया जाता है। इन्हें वेश बदलने से लेकर घात लगाकर हमला करने में कोई मात नहीं दे सकता। संसद भवन और राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा का जिम्मा इनके पास ही है। कोबरा का गठन 2008 में किया गया था।
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एलीट
एलीट पैरा कमांडो हवा में मार करने के लिए ट्रेंड होते हैं। इन जवानों को 30 से 35 हजार फुट की ऊंचाई से छलांग लगाने में महारत हासिल होती है। भारतीय सेना के एलीट पैराकमांडोज ने इंडो-म्यांमार बार्डर पर सॢजकल मिशन को अंजाम दिया। इन यूनिट में स्पैशल ट्रेंड कमांडोज होते हैं। ये कमांडोज पैराशूट रैजीमैंट का हिस्सा हैं। इसमें स्पैशल फोर्सेस की 7 बटालियंस शामिल हैं। इस कमांडो यूनिट का निर्माण भारत और पाकिस्तान के बीच 1,965 में हुई जंग के दौरान हुआ था। भारतीय सेना के ट्रेंड कमांडोज दुश्मनों को छलने के लिए विशेष ड्रैस का इस्तेमाल करते हैं। इन ड्रैसों का हल्का रंग रेगिस्तान में और गाढ़ा रंग हरियाली के बीच उन्हें छिपने में मदद करता है। कमांडो एक खास झिल्लीदार सूट भी पहनते हैं जिन्हें किसी वातावरण में छिपने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। स्पैशल फोर्स पर्पल बैरेट पहनते हैं और इनकी इसराइली टेओर असॉल्ट राइफल इन्हें पैरामिलिट्री फोर्स से अलग बनाती है।
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एस.पी.जी
एस.पी.जी. को प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है। हालांकि ये अपनी ट्रेडमार्क सफारी सूट में हमेशा दिखते हैं लेकिन कुछ खास मौकों पर एस.पी.जी. कमांडोज को बंदूकों के साथ काली ड्रैस में भी देखा जाता है। एस.पी.जी. के जवान बहुत ही ज्यादा चुस्त और समझदार होते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में इसे बनाया गया, अब यह कमांडो फोर्स पूर्व प्रधानंमत्री और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

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फोर्स वन
फोर्स वन कमांडो अपनी तेज प्रतिक्रिया के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है जिसे महाराष्ट्र सरकार ने 2010 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद बनाया है। इनका मुख्य काम मुंबई मैट्रोपॉलिटेन को सुरक्षित रखना है। यह स्पैशल फोर्स दुनिया की सबसे तेज स्पैशल फोर्सेस में से एक है जिन्हें किसी भी आपदा से लडऩे के लिए सिर्फ 15 मिनट की जरूरत होती है।
—गिरीश यादव


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