चीन से निपटने के लिए भारत की तैयारी, सीमा पर बनाएगा मजबूत ढांचा

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Friday, October 13, 2017-7:10 PM

नई दिल्ली ( ब्यूरो): चीन से निपटने के लिए भारत ने तैयारी कर ली है। चीन से लगी 4000 किलोमीटर लम्बी सीमा के इलाके में सरकार ने ढांचागत सुविधा बढ़ाने का फैसला किया है। डोकलाम में चीन के साथ सैन्य तनातनी की पृष्ठभूमि मेें सरकार लम्बे वक्त से चली आ रही इस जरुरत को पूरा करने पर ध्यान देगी। यहां थलसेना के छमाही सम्मेलन के दौरान डोकलाम विवाद पर गहन चर्चा की गई। सम्मेलन में खासकर चीन से लगे सीमांत इलाकों में पैदा सुरक्षा चुनौतियों से निबटने के उपायों पर भी कमांडरों ने अपने विचार रखे। 

कमांडरों के सम्मेलन के बारे में यहां आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सोमवार से शुरू एक सप्ताह के इस सम्मेलन में थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कमांडरों से कहा कि हर तरह की चुनौती का मुकाबला करने के लिये हर वक्त तैयार रहें। इसी के मद्देनजर थलसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि सभी तरह के हथियारों, गोला बारूद और सैनिक साज सामान को हासिल करने को प्राथमिकता दें। 

विवादित इलाकों में बढ़ाई जाएगी सुरक्षा
सुत्रों ने कहा कि सम्मेलन में चीन से लगे सीमांत इलाकों में क्षमता को बढ़ाने का मसला छाया रहा। इसी पृष्ठभूमि में सम्मेलन में यह फैसला लिया गया कि चीन से लगे सीमांत इलाकों खासकर विवाद के इलाकों में सेना की क्षमता के साथ ढांचागत सुविधा बढ़ाई जाए। सम्मेलन को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सम्बोधित करते हुए विदेशी और आंतरिक चुनौतियों से मुकाबला में सेना के प्रयासों की सराहना की और तीनों सेनाओं में तालमेल और एकीकरण बढ़ाने पर जोर दिया। 

बीआरओ को कराया जाएगा धन मुहैया 
कमांडर सम्मेलन के फैसलों की जानकारी देते हुए थलसेना के स्टाफ ड्यूटी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विजय सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में चार पर्वतीय दर्रों नीति, लिपुलेख, थांगला-1 और त्सांगचोकला को प्राथमिकता के आधार पर 3 साल के भीतर जोड़ा जाएगा। रक्षा मंत्रालय के तहत सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को ढांचागत निर्माण तेज करने के लिये अतिरिक्त धन मुहैया कराए जाएंगे। जनरल सिंह ने कहा कि सीमा पर विभिन्न सेक्टरों के बीच सम्पर्क और पड़ोसी इलाकों के बीच आवागमन बेहतर बनाने के बारे में भी चर्चा की गई। जनरल सिंह ने  बताया कि सेना में सुधार को शेकातकर समिति की जिन सिफारिशों को रक्षा मंत्रालय ने मंजूर किया है उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
 

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