कारगिल विजय दिवस- भारत की जीत के लिए वाजपेयी ने इस मंदिर में कराई थी पूजा

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Wednesday, July 26, 2017-12:13 PM

नई दिल्लीः भारतीय सेना ने 26 जुलाई, 1999 को कश्मीर के कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा कब्जाई गई चोटियों पर फतेह हासिल की थीं। कारगिल में घुसपैठ के बाद भारतीय सेना द्वारा ऑप्रेशन विजय चलाया गया था और 2 महीने तक चले इस युद्ध में देश ने 527 सैनिक खो दिए थे, जबकि 1300 से अधिक घायल हो गए थे। विश्व के इतिहास में कारगिल युद्ध दुनिया के सबसे ऊंचे क्षेत्रों में लड़ी गई जंगों में शामिल है। इस इतिहासिक दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस युद्ध में जीत हासिल करने के लिए तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विशेष उपासना कराई थी। यह उपासना भारतीय सेना की कामयाबी के लिए थी।

यहां करवाया था वाजपेयी ने युद्ध
वाजपेयी ने मध्य प्रदेश के दतिया में पीताम्बरा पीठ की मां बगलामुखी के मंदिर में विशेष यज्ञ करवाया था। ऐसी मान्‍यता है कि दतिया की मां बगलामुखी की उपासना से शत्रु का नाश होता है। जब-जब देश पर युद्ध की विपत्ति आई तब-तब यहां पर विशेष यज्ञ करवाया गया। 1965 और 1971 के युद्ध में भी मां बगलामुखी के मंदिर में विजय प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया गया था। साधकों ने कई दिनों तक दुश्‍मन पर जीत के लिए साधना और यज्ञ किया।
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इसलिए खास है ये मंदिर
मान्यता है कि इस मंदिर से भी कोई पुकार अनसुनी नहीं जाती। ये सिद्धपीठ है। इस मंदिर की स्थापना 1935 में परम तेजस्वी स्वामी जी के द्वारा की गई थी। मां पीतांबरा का जन्म स्थान, नाम और कुल आज तक रहस्य बना हुआ है। मां का ये चमत्कारी धाम स्वामी जी के जप और तप के कारण ही एक सिद्ध पीठ के रूप में देशभर में जाना जाता है।

राजसत्‍ता की देवी है मां पीतांबरा
अधिष्ठात्री देवी के साथ ही मां बगलवामुखी को राजसत्ता प्राप्ति की मां भी माना जाता है। अगर विधि-विधान से अनुष्ठठान किया जाए तो मां जल्द ही प्रसन्न होकर हर मनोकामना पूरी करती है। राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा-अर्चना करते हैं। मां पीतांबरा शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी भी है।

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