ये हैं 3 इडियट्‍स के असली 'फुंसुख वांगडु', जिन्हें रोलेक्स अवॉर्ड से नवाजा गया(Pics)

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Saturday, November 19, 2016-12:11 PM

नई दिल्लीः '3 इडियट्स' फिल्म में अामिर खान ने जिस फुंसुख वांगड़ू का किरदार निभाकर फिल्म को नई बुलंदियां दे दी थी, वह किरदार काल्पनिक नहीं, बल्कि असली है। आमिर का '3 इडियट्स' फिल्म का किरदार लद्दाख के रहने वाले इंजीनियर सोनम वांगचुक से प्रेरित था, जिन्हें रोलेक्स अवॉर्ड से नवाजा गया है। यह अवॉर्ड दुनियाभर से कुल 140 लागों को दिया जाना है। आर्थिक और सामाजिक स्तर पर पिछड़े जम्मू एवं कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र की शिक्षा प्रणाली में सुधार का बीड़ा उठाने वाले सोनम वांगचुक ने एक ऐसे स्कूल की स्थापना की, जहां लीक से हटकर चीजें सिखाई जाती हैं।

सड़ चुकी है देश की शिक्षा प्रणाली 
वांगचुक ने 1988 में लद्दाख के बर्फीले रेगिस्तान में शिक्षा की सुधार का जिम्मा उठाया और स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (सेकमॉल) की स्थापना की। वांगचुक का कहना है कि देश की शिक्षा प्रणाली सड़ चुकी है। स्कूल और कॉलेजों में सिर्फ नंबर पर फोकस किया जाता है और उन्हीं नंबरों के आधार पर छात्र को पास या फेल किया जाता है। ये क्या है? आप इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कॉलेज से निकलने के बाद इनके पास रोजगार नहीं होता तो दूसरी तरफ उद्यमों के पास योग्य कर्मचारियों की कमी रहती है।

फेल हुए छात्र भी कर सकते हैं चमत्कार 
उनका कहना है कि हमारे स्कूल ने साबित किया है कि देश की शिक्षा प्रणाली में नंबरों की दौड़ में फेल हो चुके छात्र भी चमत्कार कर सकते हैं। हमारा विश्वविद्यालय सभी तरह के छात्रों के लिए है, जहां छात्र रट्टू तोता बनने की जगह प्रैक्टिकल तौर पर सीखेंगे। हालांकि, इस परियोजना के लिए राज्य सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। वह कहते हैं कि हमें खुद ही पूंजी जुटानी है। हम लोग 15 नवंबर से फंड रेजिंग अभियान शुरू करने जा रहे हैं। हमने सालभर पहले अपनी कृत्रिण ग्लेशियर परियोजना को प्रतिष्ठित रोलेक्स अवॉर्ड के लिए भेजा था। इस पुरस्कार के साथ मिलने वाली एक करोड़ रुपए की ईनामी धनराशि को विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दान करूंगा और इसके साथ ही सामान्य क्राउड फंडिंग शुरू करेंगे।

दुनियाभर के शिक्षा क्षेत्र में बदलाव 
इस स्कूल ने लद्दाख में पुरानी स्कूल प्रणाली को बदल कर रख दिया है और अब वह इस विश्वविद्यालय के साथ पूरे देश की शिक्षा प्रणाली एवं दुनियाभर के शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए कमर कस चुके हैं। वांगचुक कहते हैं कि शिक्षा समस्याओं का समाधान निकालने के लिए ही होनी चाहिए न सिर्फ डिग्रियां बटोरने के लिए। हमने फ्यूचरिस्टिक इंस्टीटयूट के साथ साझेदारी की है जो इस विश्वविद्यालय की डिजाइनिंग में मदद कर रहा है। वागंचुक को लद्दाख में बर्फ स्तूप कृत्रिम ग्लेशियर परियोजना के लिए भी हॉलीवुड में पुरस्कृत किया जा रहा है। यह कृत्रिम ग्लेशियर 100 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, जिसे अनावश्यक पानी को इकट्टा कर बनाया गया है।


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