नाेटबंदी : सर्वे में आम जनता को भूले पीएम मोदी!

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Thursday, November 24, 2016-7:03 PM

नई दिल्ली : 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद किए जाने की घोषणा के बाद पैदा हुए हालात को लेकर जब नरेंद्र मोदी सरकार आलोचनाओं से घिरने लगी तो पीएम मोदी ने अपनी फैसले के बारे में लोगों की राय जानने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। 22 नवंबर को दोपहर 3.30 पर पीएम मोदी ने ट्विटर और फेसबुक एक मोबाइल ऐप जारी किया जिसमें नोटबंदी से जुड़े 10 सवाल थे। पीएम मोदी ने ऐप के लिंक के साथ ट्वीट किया कि करंसी नोट पर लिए गए फैसले पर मैं सीधे आपकी राय जानना चाहता हूं।

पीएम मोदी के ट्वीट को आठ हजार से अधिक लोगों ने रीट्वीट किया और 21 हजार से अधिक लोगों ने लाइक किया। 23 नवंबर शाम 6.40 पर पीएम मोदी ने इस सर्वे के प्रारंभिक नतीजे जारी किए। सर्वे के परिणाम के अनुसार ज्यादातर सवालों में पीएम को 90 प्रतिशत या उससे ज्यादा प्रतिशत पार्टिसिपेंट का समर्थन मिला। करीब 5 लाख लोगों ने एन.एम. ऐप के जरिए इस सर्वे में हिस्सा लिया था। 24 नवंबर को दिन के 12 बजे तक पीएम मोदी के ट्विटर पर 2,48,03,766 फॉलोवर्स थे।

केवल स्मार्टफोन यूजर्स ही देश के नागरिक नहीं 
जिस तरह पीएम मोदी ने नोटबंदी पर उठ रहे सवालों के खिलाफ इस सर्वे के नतीजे को जनमत की तरह पेश किया है वो एक अन्य मायने में काफी चिंताजनक है। इस साल फरवरी तक भारत की 120 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले देश में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या 22 करोड़ थी। इन आंकड़ों से साफ है कि मोबाइल ऐप पर कराया गया कोई भी सर्वे देश की करीब 20 प्रतिशत आबादी से ज्यादा तक पहुंच नहीं रखता। एेसे में क्या अब उन्हीं लोगों को विचार माने जाएंगे जिनके पास स्मार्टफोन होगा। 

सर्वे में सीधी राय देने की नहीं काेई छूट
पीएम मोदी के सर्वे में पूछे गए सवाल जैसे कि क्‍या आपको लगता है कि भारत में कालाधन है. का जवाब हां या ना में देना संभव नहीं है। सवालों के घेरे में पीएम मोदी का केवल नोटबंदी का फैसला ही नहीं बल्कि उसे लागू करने का तरीका भी है। सर्वे में एक भी ऐसा सवाल नहीं पूछा गया जिसमें जनता फैसले को लागू किए जाने पर सीधी राय दे सके। 


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