एक छोटे से आइडिया ने बदल दी जिंदगी

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Thursday, November 24, 2016-7:20 PM

नई दिल्ली: 500 और 1000 रुपए के नोटबंद होने के बाद से ही बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी लाइनें लगी हैं। लोग पैसों के लिए लाइन में लगे हुए हैं। वहीं एक कंपनी ऐसी भी है जिसे इस नोटबंदी ने मालामाल कर दिया है। जी हां हम बात कर रहे हैं मोबाइल पेमेंट कंपनी पेटीएम की जिसका इन दिनों गोल्डन टाइम चल रहा है। इस कंपनी के फाउंडर विजय शेखर ने बड़ी ही मेहनत से इस कंपनी को खड़ा किया और आज ये कंपनी बहुत ऊंचे मुकाम पर पहुंच चुकी है। ये बात किसी ने भी नहीं सोची होगी कि एक दुकान के बाहर लगे कागज के सामने अपना मोबाइल ले जाए और आपकी पेमेंट हो जाएगी। अब धीरे-धीरे कैश की सुविधा कम होने लगी है। लोग Paytm से ही मेमेंट करना ज्यादातर पंसद कर रहे हैं और ये सब संभव हो पाया है विजय शेखर की मेहनत से।

यूपी के अलीगढ़ के विजय शेखर महज 37 साल के हैं और इतनी उम्र में वे स्टार्टअप के सबसे बड़े बाजीगर बन गए हैं। नोटबंदी के दौर में पेटीएम एप से ट्रांजैक्शन की तादाद कई गुना बढ़ चुकी है। ऑटो रिक्शा का भाड़ा, चाय की दुकान पर पेमेट या फिर किराना स्टोर से सामान खरीदना हो, बस आपके मोबाइल में पेटीएम ऐप होना चाहिए और पेटीएम के वॉलेट में पैसे, आप बिना कैश के छोटी-बड़ी खरीदारी आसानी से कर सकते हैं। खुद विजय शेखर मान रहे हैं कि नोटबंदी के बाद से उनका कारोबार 5 गुना तक बढ़ गया है।

नोटबंदी के बाद से Paytm के जरिए करीब 70 लाख ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, जिनके जरिए 120 करोड़ रुपए का रोजाना लेन-देन हो रहा है। पिछले दिनों अरविंद केजरीवाल समेत कुछ पार्टियों ने मोदी सरकार पर नोटबंदी के बहाने पेटीएम को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इन आरोपों से विजय शेखर थोड़े दुखी जरूर हैं लेकिन फिर भी कमजोर नहीं पड़े हैं।

एक छोटा सा आइडिया और बन गई इतनी बड़ी कंपनी
दिल्ली से सटे नोएडा के वन97 की बिल्डिंग में पेटीएम का हेडक्वार्टर है। विजय शेखर को पेटीएम जैसा एप बनाने का आइडिया कैसे आया इसकी कहानी भी बहुत दिलचस्प है। विजय शेखर बताते हैं कि यूएस में रिक्शे वाले ने कार्ड से पेमेंट लिया इसी से उन्हें आइडिया आया। विजय शेखर की सोच अब हकीकत बन चुकी है। पेटीएम से पेमेंट लेने वालों में ऑटो रिक्शा, टैक्सी, रेस्टोरेंट से लेकर पान वाले तक शामिल हैं। पेटीएम के मोबाइल वॉलेट यूजर्स की संख्या 15 करोड़ के करीब है। देशभर में करीब 10 लाख छोटे-बड़े दुकानदार हैं, जो पेटीएम से पेमेंट ले रहे हैं।

ऐसे करें Paytm का यूज
Paytm का मतलब है पेमेंट थ्रू मोबाइल यानी मोबाइल के जरिए भुगतान। पेटीएम के ई वॉलेट में कुछ पैसे जमा कीजिए और वॉलेट से ही पेमेंट कर दीजिए। पेटीएम में थर्ड पार्टी कॉस्ट नहीं है। जबकि क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से भुगतान करने में ग्राहक और दुकानदार के बीच कई कड़िया होती हैं। पहले ग्राहक एक बैंक का डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेता है फिर उसे दुकानदार के यहां स्वाइप करता है। यहां से दुकानदार के बैंक अकाउंट में पैसा जमा होता है जबकि पेटीएम में आप अपने मोबाइल वॉलेट से तुरंत दुकानदार के मोबाइल वॉलेट में पैसे जमा करता है।

कैसे होता है Paytm को फायदा?
पेटीएम सिर्फ मोबाइल पेमेंट कंपनी ही नहीं बल्कि ई कॉमर्स कंपनी भी है। यानी इसके जरिए सामानों की खरीदारी भी की जा सकती है। विजय शेखर बताते हैं कि कंपनी रॉबिन हुड जैसा काम करती है। छोटे दुकानदारों से कोई पैसे नहीं लेते। पेटीएम किराना स्टोर, ऑटो वालों, पान वाले या फिर छोटे दुकानदारों से कोई चार्ज नहीं लेती, सिर्फ कॉर्पोरेट्स से चार्ज वसूलती है। जैसे- उबर टैक्सी, बस टिकट बुकिंग, हवाई टिकट बुकिंग और मल्टीप्लेक्स में टिकट बुकिंग कराने पर कंपनियों से पेटीएम को फायदा पहुंचता है।

सरकार ने बढ़ा दी मोबाइल वॉलेट की लिमिट
नोटबंदी के बाद आम जनता की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए सरकार ने मोबाइल वॉलेट की लिमिट बढ़ा दी है। अब वॉलेट में 10 हजार की बजाए 20 हजार रुपए रख सकते हैं जबकि पेटीएम से जुड़े दुकानदारों के लिए ये लिमिट 50 हजार रुपए है। जल्द ही पेटीएम बैंकिंग सेक्टर में भी कदम रखने वाला है। पेटीएम को आरबीआई से पेमेंट बैंक का लाइसेंस भी मिल चुका है, जो नॉर्मल बैकिंग से थोड़ा अलग है। पेमेंट बैंक के तहत 1 लाख रुपए तक की जमा ले सकते हैं लेकिन कर्ज नहीं दे सकते। एक छोटी सी कंपनी को भारत का सबसे बड़ा स्टार्टअप बनाने वाले विजय शेखर के मुताबिक डिजिटल इंडिया की क्रांति जो इन दिनों भारत में है वैसी दुनिया के किसी और देश में नहीं है। शेखर ने कहा कि भारत डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है।


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