बिजली संकट की चपेट में कश्मीर, कई इलाकों में 14 घंटों तक की बिजली कटौती

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Monday, November 21, 2016-2:55 PM

श्रीनगर : कश्मीर में सर्दियों के आगमन के साथ ही भयंकर बिजली संकट शुरु हो गई है। आलम तो यह है कि कश्मीर के कई इलाकों में लोगों को आठ से लेकर 14 घंटों तक की भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।


आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय और स्टेट सेक्टर के तहत कुल 28 पन बिजली परियोजनाओं की 2693.45 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। कड़ाके की ठंड में दरियाओं में नदियों के जल स्तर में भारी गिरावट से 700 से 800 मेगावाट बिजली उत्पादन ही हो पा रहा है।
इसमें से भी केंद्रीय परियोजनाओं में एनएचपीसी की ओर से उत्पादित हो रही करीब आधी बिजली को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा है। करीब 400 मेगावाट बिजली ही रियासत के उपभोक्ताओं के लिए प्रयोग करने को उपलब्ध हो पा रही है।


आमतौर पर सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वादी के निवासियों को बिजली की अघोषित कटौती से परेशान होना पड़ता है। कई इलाकों में में 24 घंटे में से बमुश्किल दस घंटे मिल पा रही है। भीषण ठंड और बिजली गुल रहने से लोग परेशान होते हैं। ऐसी स्थिति में बिजली कटौती होने के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से कई दफ ा शिकायत की लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
छानापुरा, हैदरपुरा, रामबाग, सनंतनगर, शिवपुरा, बटवारा, सोनवार, नूरबाग, बटपुरा, अरमपुरा आदि इलाकों के लोगों ने कहा कि बजली की कटौती हो रही है, कभी-कभी रात को लाइट एक-एक घंटे के लिए गुल हो जाती है।


उन्होने कहा कि भीषण ठंड के इस मौसम में अन्धाधुंध बिजली कटौती से लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। कटौती के कारण इन्वर्टर व अन्य उपकरण भी जवाब दे रहे हैं।
छात्रों की छुट्यिों की पढ़ाई भी चौपट हो रही है। बिजली संकट के कारण बच्चों की नींद नहीं पूरी हो पा रही है, बुजुर्गों के स्वाथ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। आलम यह है कि कई क्षेत्रों में दिन के साथ-साथ रात को भी बिजली केवल चंद मिनटों के लिए आती है और गुल हो जाती है। कई क्षेत्रों में कम वोल्टेज के कारण उपकरण तक काम नहीं कर रहे।
पुराने शहर इत्यादि क्षेत्रों में बिजली की कटौती की समस्या से लोगों का जीना मुहाल है। ट्रांसमिशन और बिजली वितरण की व्यवस्था की खस्ता हालत की वजह से भी बड़े पैमाने पर बिजली की आपूर्ति बाधित होती है।


श्रीनगर के अलावा घाटी के अन्य कई इलाकों के लोगों ने कहा कि पिछले करीब 10 दिन से बिजली के प्रतिदिन करीब छह से नौ घंटे के अघोषित कट लग रहे हैं, जिसके  बार में स्थानीय पॉवर काम के अधिकारियों द्वारा कोई पूर्व सूचना जारी नहीं की जाती। उन्होंने बताया कि सुबह व दोपहर को लगे कटों से लोग त्राहि-त्राहि कर उठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विभाग की हैल्पलाईन में जो टेलीफोन नंबर दिए गए है उन्हें कोई नहीं उठाता। अगर वह शिकायत केंद्र जाते हैं तो भी वहां कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं मिलता। उनका यह भी आरोप है कि शिकायत करवाने के बाद चार पांच घंटे बाद ही कोई कर्मचारी मौके पर पहुंचता है और देरी के आने के बारे में यह तर्क दिया जाता है कि स्टाफ  की कमी है इस लिए शिकायतों को निपटाने में समय लगता है।


पीडीडी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बिजली की कोई कमी नहीं है लेकिन ओवरलोडिंग होने पर बिजली कटौती करना विभाग की मजबूरी होती है ताकि बिजली के बुनियादी ढांचे को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाया जा सके। शैड्यूल कटौती के अलावा अनियमित कटौती केवल ओवरलोडिंग के कारण होती है।  

 


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