पासपोर्ट में ज़रूरी नहीं होगा जैनेटिक पिता का नाम, हाईकोर्ट ने दी राहत

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Sunday, November 20, 2016-6:05 PM

चंडीगढ़ : पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने पासपोर्ट में पिता के नाम को लेकर एक बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने अपने इस फैसले में साफ़ कर दिया है कि पासपोर्ट में  जैनेटिक पिता का नाम ज़रूरी नहीं होगा। यदि आवेदक के पिता सौतेले हैं तो ऐसे में आवेदन करते हुए सौतेले पिता का नाम लिखा जा सकता है। 

मामले में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया कि पानीपत निवासी याची की मां का 20 वर्ष पहले 1996 में तलाक हो चुका है। तलाक के समय मोहित की आयु 7 वर्ष और उसकी बड़ी बहन 9 वर्ष की थी। एक वर्ष बाद याची की मां ने दूसरा विवाह कर लिया था। तब से याची अपनी बड़ी बहन और मां के साथ सौतेले पिता के साथ ही रह रहा है।

उसके राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और यहां तक कि स्कूल के सर्टिफिकेट में भी मोहित के पिता के स्थान पर उसके सौतेले पिता का नाम ही लिखा हुआ है। जब याची ने पासपोर्ट अप्लाई किया तो पासपोर्ट कार्यालय ने उसका पासपोर्ट बनाए जाने से इनकार दिया और कहा कि वह पासपोर्ट में अपने वास्तविक पिता का नाम ही दर्ज करवाए।

जस्टिस आरके जैन ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता जब 7 वर्ष का था तब से सौतेला पिता ही उसकी देखभाल कर रहे हैं और लगभग सभी सरकारी दस्तावेजों पर यही नाम दर्ज है। ऐसे में पासपोर्ट कार्यालय ऐसी कोई शर्त नहीं लगा सकता है। लिहाजा हाईकोर्ट ने पासपोर्ट कार्यालय को एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता को पासपोर्ट जारी करने के निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है।


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