पराली जलाने से रोकने के लिए ठोस समाधान निकालें: एनजीटी

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Wednesday, November 22, 2017-10:56 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को केंद्र और पांच उत्तरी राज्यों की सरकारों से कहा कि पराली जलाने से रोकने के लिए ठोस समाधान निकालें जिसमें विद्युत संयंत्रों में पराली का इस्तेमाल करना भी शामिल है। 

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों से कहा कि 28 नवम्बर को बैठक बुलाएं ताकि विद्युत संयंत्रों में पराली के इस्तेमाल और उनके परिवहन पर स्पष्ट रूपरेखा तय की जा सके। इसने आदेश दिया कि बैठक में कृषि मंत्रालय के सचिव, ऊर्जा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव, संबंधित राज्यों के कृषि मंत्रालयों के प्रधान सचिव, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के वरिष्ठ वैज्ञानिक, राष्ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन संघ के प्रबंध निदेशक और एनटीपीसी के सीएमडी हिस्सा लेंगे।

सुनवाई के दौरान एनटीपीसी ने पीठ को बताया कि वह विद्युत संयंत्रों में पराली का इस्तेमाल करना चाहता है जिसमें अनुमन्य नमी हो क्योंकि पराली को इन संयंत्रों में सीधे ईंधन के स्रोत के तौर पर इस्तेमाल करना संभव नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि बैठक में चर्चा होनी चाहिए कि ‘‘क्या हर राज्य को पैलेटाइजेशन संयंत्र बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं ताकि वे एनटीपीसी द्वारा संचालित ताप विद्युत संयंत्रों के लिए पराली के माध्यम से ईंधन बना सकें।’’

हरित पैनल ने कहा, ‘‘यह भी विचार किया जाना चाहिए कि क्या राज्यों को स्वतंत्रता दी जानी चाहिए कि वे निजी कंपनियों के मार्फत अपने राज्यों में ऐसे संयंत्रों की स्थापना कर सकें।’’ अधिकरण ने उनसे कहा कि पराली के परिवहन की व्यवस्था विकसित करने और किसानों को दी जानी वाली प्रोत्साहन राशि की भी अनुशंसा करें। 
 

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