दमदार छवि के थे सावंरलाल, इनकी जान बचाने के लिए मीटिंग छोड़कर आ गई थी वसुंधरा

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Wednesday, August 09, 2017-2:52 PM

जयपुर: राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष और सांसद सावंर लाल जुझारू छवि के नेता थे और सदैव सर्वहारा वर्ग के हितों के लिए संर्घषरत रहे। जाट का जन्म 1 जनवरी 1955 को अजमेर जिले के गोपालपुरा गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। वह अजमेर लोकसभा संसदीय सीट से भाजपा के सांसद थे। गत 22 जुलाई के दिन अमित शाह अपने तीन दिन के दौरे के दौरान भाजपा ऑफिस में प्रदेश के सभी अध्यक्षों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान अपनी बात रखने के बाद जाट बेहोश हो गए थे। इस दौरान सीएम वसुंधरा राजे चिंतित दिखाई दी थीं। वे जाट के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए खुद भागदौड़ करती नजर आईं थीं। इसके बाद वे तत्काल अस्पताल भी पहुंची और सांवरलाल जाट की तबियत की जानकारी ली थीं।
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परिचय
प्रो जाट विजयनगर के प्राज्ञ महाविद्यालय से बी.कॉम किया और 1975 से 77 के बीच अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविधालय में एम काम की डिग्री ली और इसके बाद वह 1977-78 में इसी कालेज में एबीएसटी संकाय में लेक्चरर रहे। इसके बाद वह सांभरलेक में तथा 1983 में राजस्थान विश्वविद्यालय में कार्य किया।  राजस्थान की सक्रिय राजनीति में आने के बाद प्रांरभ में जाट ने लोकदल और जनता दल से जुडे। प्रांरभ में वह प्रदेेश युवा जनता के महामंत्री बने और वर्ष 1990 के चुनाव में वह पहली बार विधायक बने।1990 में जनता दल का विभाजन होने के बाद उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
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जाट का राजनीतिक सफर
-राजस्थान की 14वीं विधानसभा में नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे और बाद में उन्होंने मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री के पद की शपथ ली थी।

-उन्होंने वाणिज्य में स्नातकोतर करने के बाद राजस्थान विश्वविधालय में शिक्षक का कार्य किया।

-वह नौंवी दसवी ग्यारहवीं और 12 विधानसभा में विधानसभा के अजमेर जिले की भिनाई विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे और 14वीं विधानसभा में वह नसीराबाद से चुने गए।

-वह 1993, 2003, और 2013 में राजस्थान सरकार में मंत्री रहे।  

-प्रो जाट ने भैरोसिंह शेखावत मंत्रिमंडल में 11 दिसंबर 1993 में पहली बार मंत्री बने और 2008 में फिर विधायक चुने जाने के बाद राजे के पहले शासन में भी मंत्री बनाए गए। उसके बाद केन्द्र में मोदी सरकार बनने पर उन्हें केंद्रीय जल संसाधन राजय मंत्री बनाया गया और केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद उन्हें पद से हटाया गया जिन्हें राजे सरकार ने पुन राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया।

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