उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति के चुनाव में होता है ये फर्क

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Tuesday, July 18, 2017-2:32 PM

नई दिल्लीः देश के दूसरे सबसे बड़े सांवैधानिक पद उपराष्ट्रपति के चुनाव 5 अगस्त को होंगे और इसका परिणाम भी उसी दिन आ जाएगा। कई लोगों को लगता है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव एक जैसा होता है, लेकिन नहीं उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रक्रिया थोड़ी अलग होती है। भारत के अगले उपराष्ट्रपति का चुनाव वैंकैया नायडू और गोपालकृष्ण गांधी के बीच में लड़ा जाएगा। अाईए जानते हैं कि देश के उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है: - 

कैसे अलग है यह चुनाव?
दोनों चुनाव प्रक्रिया के बीच पहला फर्क यह है कि राष्ट्रपति चुनाव में संसदों के साथ ही विधायक भी चुनाव करते हैं लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते हैं। दूसरा यह कि संसद के दोनों सदनों के लिए मनोनीत सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाल सकते। जबकि उपराष्ट्रपति चुनाव में दोनों सदनों के मनोनित सदस्य भी वोटिंग में हिस्सा ले सकते हैं। चुनाव आयोग के अनुसार इस साल के चुनाव के लिए इलेक्टोरल कॉलेज में राज्यसभा से 233 चुने गए और 12 नॉमिनेटेड सदस्य हैं। इसके अलावा लोकसभा से 543 चुने गए और 2 नॉमिनेटेड सदस्य हैं। इस तरह इलेक्टोरल कॉलेज में कुल सदस्यों की संख्या 790 है।

हर वोट की वैल्यू 1 
उपराष्ट्रपति के चुनाव में हर वोट की वैल्यू 1 होती है। चुनाव के लिए प्रत्याशी के नाम वाला बैलेट पेपर इस्तेमाल किया जाता है। जीतने वाले उम्मीदवार को वोटों का जरूरी कोटा पूरा करना होता है, जो कुल वैध वोटों का 50 फीसदी होता है।

उपराष्ट्रपति बनने के लिए अहम याेगिताएंः-
1) भारत का नागरिक होना जरूरी।
2) उसकी आयु 35 साल से अधिक होनी चाहिए।
3) राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के योग्य हो।
4) उपराष्ट्रपति के पास भारत सरकार या राज्य सरकार या किसी अन्य स्थानीय सरकार के तहत कोई ऑफिस ऑफ प्रॉफिट नहीं होना चाहिए।

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