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success story: कभी चलाते थे किराना दुकान, अब हैं 104 सैटेलाइट लॉन्च टीम के साइंटिस्ट

  • success story: कभी चलाते थे किराना दुकान, अब हैं 104 सैटेलाइट लॉन्च टीम के साइंटिस्ट
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Thursday, February 16, 2017-1:56 PM

रायपुर: भारत के अंतरिक्ष मिशन के लिए बुधवार को ऐतिहासिक दिन रहा क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक साथ 104 उपग्रहों को लॉन्च किया। इस सफलता के पीछे एक किराना दुकान चलाने वाला युवक भी शामिल है तो वहीं छत्तीसगढ़ का ही एक और युवक भी इस टीम का हिस्सा है। छत्तीसगढ़ के छोटे से शहर कोरबा के गांव में किराने की दुकान चलाने वाले विकास अग्रवाल ने मेहनत के दम पर इतनी ऊंची उड़ान भरी है। इसके लिए उसने इसरो का एग्जाम दिया और पांचवीं रैंक हासिल कर साइंटिस्ट बने। विकास अग्रवाल 6वीं क्लास से किराना दुकान में लोगों को सामान बेचते हुए खाली समय में सेल्फ स्टडी करते थे क्योंकि उनका सपना था साइंटिस्ट बनना और इसके लिए वह अपना एक भी पल गंवाते नहीं थे, उनको जब भी समय मिलता वो पढ़ने बैठ जाते थे। इसी कड़ी मेहनत ने अपना रंग दिखाया और अब वे इसरो में साइंटिस्ट हैं।

ऐसे पहुंचे अपने लक्ष्य तक
12वीं में विकास 89 परसेंट लाने में कामयाब रहे। इसी दौरान उन्होंने ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग यानी गेट दिया। देशभर में 1600 रैंक आई लेकिन घरवालों ने दूर रहकर पढ़ने की अनुमति नहीं दी लेकिन घरवालों को बिना जानकारी दिए विकास ने अपनी साइंटिस्ट बनने की तैयारी जारी रखी। तबी उन्हें इसरो के एग्जाम के बारे में पता चला तो उन्होंने फॉर्म भर दिया। साल 2014 में इसरो का टेस्ट दिया, मगर कामयाबी नहीं मिली। निराश होने के बजाय खामियां सुधारकर दोगुने जोश से तैयारी की और साल 2015 में फिर एग्जाम दिया। अक्तूबर 2015 में हुए रिटन एग्जाम में देशभर से शामिल दो लाख युवाओं में विकास ने ऑल इंडिया टॉप -5 रैंक हासिल की। साइंटिस्ट की इस पोस्ट के लिए विकास सहित 300 लोगों को फरवरी 2016 में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, जिसमें विकास चुन लिए गए।

104 उपग्रह लॉन्चिंग में भी कॉन्ट्रीब्यूशन
बुधवार के 104 उपग्रह लॉन्च कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले इसरो की टीम में विकास अग्रवाल का भी कॉन्ट्रीब्यूशन रहा है। विकास इन दिनों इसरो के त्रिवेंद्रम सेंटर में हैं। यहां सैटेलाइट को लेकर जाने वाले रॉकेट तैयार किए जाते हैं। विकास ने बताया कि सभी उपग्रहों को लेकर पीएसएलवी 37 ने श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। इसरो ने करीब 28 मिनट के अंदर सभी 104 सैटेलाइट को अपनी-अपनी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। इसी के साथ वर्ल्ड स्पेस साइंस में इसरो ने अपनी धमक और मजबूत कर ली।

नक्सली हमले में मारे गए अमन के पिता
छत्तीसगढ़ के ही अमन वाहिद भी इसरो टीम में शामिल हैं। रायपुर में पले-बढ़े अमन वाहिद पिछले तीन साल से इसरो के प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। वाहिद 104 दूरसंवेदी भू-उपग्रह की वेदर फॉरकास्ट टीम में शामिल हैं। अमन की मां हिना खान ने बताया कि अमन का सलेक्शन आईआईटी और आईएसटी दोनों में हुआ था। उस समय अमन तय नहीं कर पा रहा था कि वह किसे ज्वाइन करे। तब मां ने समझाया था कि आईआईटी में पैसा कमाया जा सकता है, लेकिन आईएसटी में एक दिन ऐसी ऊंचाई पर पहुंचेगा, जहां खुद पर फक्र होगा।
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तीन साल पहले इसरो में अमन वेदर फॉरकास्ट टीम का हिस्सा था। वेदर फॉरकास्ट टीम सेटेलाइट के प्रक्षेपण से पहले मौसम के बारे में अध्ययन करती है और प्रक्षेपण का सही समय तय करती है। अमन के पिता वर्ष 2009 में नक्सली हमले में शहीद हो गए थे। उसके बाद से दोनों भाइयों का पालन हिना खान ही कर रही हैं। अमन का भाई भी आईआईटी में पढ़ाई करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहा है।

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