सड़क किनारे खाना खा रहा अंग्रेज नहीं मामूली इंसान, हैरान कर देगी हकीकत

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Tuesday, November 21, 2017-11:43 AM

नई दिल्लीः इन दिनो एक अंग्रेज से दिखने वाले व्यक्ति की सड़क पर नीचे बैठ कर खाना खाने की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। दिखने में ये सामान्य सी फोटो है कि कुछ लोग सड़क किनारे बैठकर खाना खा रहे हैं लेकिन, इस फोटो में खाना खा रहा एक आदमी सामान्य नहीं है।  देखने में  अंग्रेज जैसा दिखने वाला ये व्यक्ति छोटी से लेकर बड़ी जगहों पर दिखता रहता है। 
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इस शख्स का नाम है ज्यां द्रेज। यूपीए शासनकाल के दौरान ये नैशनल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य थे।  कांग्रेस सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा की ड्रॉफ्टिंग इसी शख्स ने की थी। देश में अब तक के महत्वपूर्ण कानूनों में से एक माने जाने वाले आरटीआई कानून को लागू करवाने में भी ज्यां द्रेज की भूमिका रही है।   ज्यां द्रेज देश-दुनिया के अच्छे अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं।  फिलहाल रांची यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। 
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इस तस्वीर को दीपक यात्री ने 14 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर खींचा था। दीपक पेशे से स्वतंत्र पत्रकार और फोटोग्राफर हैं।  दीपक के अनुसार जंतर-मंतर पर मनरेगा वालों का धरना चल रहा था। इस दौरान दीपक और उनके साथी ईश्वर भी वहां मौजूद थे। धरना 11 से 15 सितंबर तक का था, जिसके लिए छत्तीसगढ़ से भी लोग आए थे। धरने के दौरान लोग अपनी मांगों को लेकर  प्रदर्शन कर रहे थे।

14 सितंबर की दोपहर को किसी गुरुद्वारे से प्रदर्शनकारियों के लिए एक गाड़ी में खाना आया। लोग भी वहां खाने के लिए बैठ गए। अचानक से अंग्रेज से दिखने वाले इस शख्स ने किसी से एक कटोरा मांगा और उन्हीं के साथ खाने बैठ गया।  दीपक जैसे कुछ लोगों ने ज्यां को पहचान लिया और उन्हें भरपेट खाना खिलाने की कोशिश की लेकिन ज्यां का जवाब था कि यहां प्रदर्शन कर रहे लोगों के लिए खाने को सिर्फ 2 ही रोटियां मिल रही हैं इसलिए मैं भी सिर्फ 2 ही रोटी खाऊंगां। दीपक ने उसी वक्त अपने मित्र ईश्वर से कैमरा मांगा और ज्यां की 3 तस्वीरें खींचीं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। 
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ज्यां द्रेज 1959  में बेल्जियम में पैदा हुए। पिता जैक्वेस ड्रीज अर्थशास्त्री थे।ज्यां 20 साल की उम्र में भारत आ गए और 1979 से भारत में ही रह रहे हैं। 2002 में उन्हें भारत की नागरिकता  मिली। ज्यां ने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिच्यूट, नई दिल्ली से अपनी पीएचडी पूरी की है। वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स सहित देश-दुनिया की कई यूनिवर्सिटी में पिछले 30 साल से विजिटिंग लैक्चरर हैं।  अर्थशास्‍त्र पर ज्यां द्रेज की अब तक 12 किताबें छप चुकी हैं। अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन के साथ मिलकर भी कई किताबें लिख चुके हैं।
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इसके अलावा ज्यां के लिखे 150 से ज्यादा एकैडमिक पेपर्स, रिव्यू और अर्थशास्त्र पर लेख अर्थशास्त्र में दिलचस्पी रखने वालों की समझ बढ़ाने के लिए काफी हैं।  वो भारत में भूख, महिला मुद्दे, बच्चों का स्वास्थ्य, शिक्षा और स्त्री-पुरुष के अधिकारों की समानता के लिए काम कर रहे हैं। ज्यां द्रेज पर अक्सर नक्सल समर्थक होने के आरोप लगते रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर के जदलपुर की सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया ज्यां द्रेज की पत्नी हैं। बेला भाटिया पर कई बार नक्सल समर्थक होने और उनकी मदद करने के आरोप लगते रहे हैं। 

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