वीरेंद्र दीक्षित की 'अध्यात्म' यूनिवर्सिटी में रखा जाता था लड़कियों के पीरियड्स का रिकॉर्ड

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Sunday, January 14, 2018-1:22 PM

नई दिल्लीः दिल्ली के रोहिणी में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम पर 'सेक्स आश्रम' चला रहे आरोपी बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं। दीक्षित की सताई लड़कियों के परिजनों की चिट्ठियां और शिकायत फाइलों से कई बातें सामने आई हैं। दिल्ली और राजस्थान के आश्रमों में छापेमारी के बाद पीड़ित लड़कियों के परिजन दिल्ली पुलिस और वकीलों को चिट्ठी लिख उनकी बेटी को बचाने की गुहार कर रहे हैं। शलभ गुप्ता एक एनजीओ(फाउंडेशन फॉर सोशल एंपावरमेंट) से जुड़े हैं, उन्होंने ने ही वीरेंद्र देव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। वे बताते हैं कि बाबा खुद को ईस्वर बता महिलाओं और लड़कियों को हवस का सिकार बनाता था। वह कहता था कि 2020 में दुनिया खत्म हो जाएगी और जो कि उनको कुछ अर्पित करेगा वहीं बचेगा।

परिजन अपनी बच्चियों को इसलिए आश्रम में भेजते थे ताकि अध्यात्म की दुनिया से उनका जुड़ाव हो सके। आश्रम से जुड़ी एक महिला ने बताया कि बाबा की सेवा में उसने अपनी 10 बिघा जमीन बेच डाली और 10 लाख रुपए आश्रम को दान किए। फिर 2007 को अपनी बेटी को भी आश्रम के लिए समर्पित कर दिया। जब बाबा की असलियत सामने आई तो किसीस तरह 2015 में आश्रम से भाग निकली। महिला ने बताया कि पहले तो उन्हें बाहर जाने नहीं दिया गया लेकिन जब उसने कहा कि और भक्तों को आश्रम के साथ जोड़ने जा रही है तो उसे इजाजत मिली।
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बच्चों से परिजनों की दूरी
आध्यात्मिक शिक्षा के नाम पर वीरेंद्र नाबालिग लड़कियों को आश्रम लाता था। शुरुआत में बच्चियों को उनके शहर से दूर किसी अन्य आश्रम में भेजा जाता था ताकि वे जल्दी घर न जा सकें और परिजन भी जल्दी न आकर मिल सकें। अगर माता-पिता मिलने भी आते तो उनको थोड़ी देर के लिए ही मिलने दिया जाता वो भी अकेले नहीं काफी लड़कियों के साथ ताकि वो अपने घरवालों को कुछ बता न सकें। फिर मिलना भी बंद कर दिया जाता और फोन पर बात भी कम ही करवाई जाती थी।
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'गुप्त प्रसाद' सेक्स कोड
आश्रम की ही एक महिला ने बताया कि लड़कियों को देर रात 2.30 बजे सुबह उठा दिया जाता था और टीवी के जरिए उन्हें वीरेंद्र देव के उपदेश सुनाए जाते थे। उसके बाद  लडकियां सुबह 4 बजे नहाती थीं और पूरा दिन मुरली(उपदेश) सुनती थीं। जब वीरेंद्र आश्रम में पहुंचता था तो रात के 'गुप्त प्रसाद' के लिए 8-10 लड़कियों को सिलेक्ट किया जाता। 'गुप्त प्रसाद' सेक्स का कोड था। महिला ने बताया, 'जिन लड़कियों को यह 'गुप्त प्रसाद' दिया जाता वे रानी कही जातीं और वीरेंद्र कृष्ण। इतना ही नहीं आश्रम में एक रजिस्टर था जो महिलाओं के मासिक धर्म चक्र का रिकॉर्ड रखता था। परिजन अब पछता रहे हैं कि क्यों अपनी बच्चियों को उस आश्रम में भेजा।

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