अनुशासन तथा सजा बिल्कुल भी एक ही चीज नहीं हैं। सजा और ईनामों का प्रयोग किशोर के व्यवहार को स्वतंत्र तथा जिम्मेदार बनाने हेतु नियंत्रित करने के प्रयास के तौर पर बिल्कुल भी सहायक नहीं होगा। आइए देखें कि किशोर ईनामों और सजा से क्या सीखते हैं :


*ईनाम किशोर को कुछ प्राप्त करना सिखाते हैं, न कि सहयोग करना।


*सजा किशोरों के मन में पछतावे और डर की भावना पैदा करती है। हम जिस प्रकार के रिश्ते की अपेक्षा करते हैं यह उसे चोट पहुंचाती है।


*सजा से अक्सर बदले की भावना उत्प्रेरित होती है।



सजा क्या है?
सजा रिश्ते की एक शैली है। इसमें कई चीजें शामिल हैं जैसे :


धमकियां, चीखना-चिल्लाना तथा नीचा दिखाना
कई बार धमकियां दी जाती हैं और कई बार नहीं। बहुत अधिक चीखने-चिल्लाने से स्थितियां बहुत बदतर हो जाती हैं। यदि हम बहुत अधिक चिल्लाएंगे तो किशोर इस बात पर ही अपना ध्यान लगाना शुरू कर देंगे कि हम कब चिल्लाते हैं या फिर वे सुनना भी बंद कर सकते हैं। दूसरों को नीचा दिखाना या गलत शब्दों का प्रयोग माता-पिता या किशोर किसी के लिए भी अच्छा नहीं है।  जब किशोर चीखना-चिल्लाना और नीचा दिखाना देखते हैं तो अक्सर वे खुद भी ऐसा ही करते हैं।



बातों से ध्यान हटाना और प्रारंभिक शिक्षा देना
अक्सर माता-पिता किशोरों को प्रारंभिक शिक्षा देकरउन्हें सजा देते हैं। प्रारंभिक शिक्षा  का अधिकांशत: किशोरों के साथ कोई लेना-देना नहीं होता। इससे कोई फर्क भी नहीं पड़ता। चीजों से ध्यान हटाते वक्त कई बार तो माता-पिता का व्यवहार असम्मानजनक हो जाता है।


मारना : माता-पिता गुस्से में आकर अपने किशोर को मार भी सकते हैं। मारना किशोर को नियंत्रण में करने का एक आखिरी प्रयास हो सकता है। कई बार माता-पिता को लगता है कि किशोर को सही व्यवहार सिखाने का मारने के अतिरिक्त और कोई चारा नहीं है। मारने से किशोर तथा माता-पिता दोनों को चोट पहुंचती है। किशोर को महसूस होता है कि उसे प्यार नहीं किया जा रहा। माता-पिता भी दोषी अनुभव करते हैं। किशोरों को यह महसूस होता है कि मारना किसी समस्या का हल ढूंढने का या ताकत प्राप्त करने का एक तरीका है।



अनुशासन क्या है?
अनुशासन कोई एक काम या बयान नहीं है। यह एक प्रक्रिया है जो समय लेती है। अनुशासन से किशोरों को निम्रलिखित सहायता मिलती है :
*वे अपने निर्णय खुद लेकर अपनी जिंदगी की कमान संभालते हैं।

*वे अपनी चुनी हुई स्थितियों के परिणामों से सीखते हैं।


अनुशासन के बारे में सोचें
उस समय को याद करें जब आपने अपने किशोर को सजा दिए बिना उसमें सुधार किया था।
*किशोर ने क्या किया था?


*आपने क्या किया था?


*क्या आपको लगता है कि आपके किशोर ने बेहतर व्यवहार का निर्णय लिया था?


*आप और आपका किशोर इस बारे में क्या अनुभव करते थे?


*किशोर के साथ अन्य समस्याओं के लिए उस प्रकार के अनुशासन का प्रयोग आप कैसे कर सकते थे?


*यदि आप अपने किशोर पर चीखे थे, आप ने उसे मारा था या नीचा दिखाया था, तो स्थितियों में क्या परिवर्तन हुआ होगा?



आप क्या सीखेंगे...?

*अनुशासन से आपका किशोर अधिक जिम्मेदार बनता है।


*अनुशासन से आपके किशोर को चुनाव करने तथा निर्णय लेने में मार्गदर्शन मिलता है।


*अनुशासन  किशोर के व्यवहार को अनुकूल बनाता है और एक प्रभाव पैदा करता है।


*अनुशासन का प्रयोग करने से परिवार के सभी सदस्यों के प्रति सम्मान की भावना प्रदर्शित होती है।